
रांची : झारखंड की जानी-मानी कंस्ट्रक्शन कंपनी रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन और उसकी 10 सहयोगी कंपनियों पर आयकर विभाग का डंडा चला है। आईटी की टीम पिछले तीन दिनों से कंपनी के ठिकानों पर लगातार छपेमारी कर रही है। झारखंड, बिहार और हरियाणा- तीनों राज्यों में कंपनियों पर एक साथ कार्रवाई हुई। इसमें करोड़ों रुपये के हेरफेर के सुराग मिले हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि कंपनी के पास 200 करोड़ रुपये से ज्यादा के कैश का कोई हिसाब-किताब नहीं है। अधिकारी अब इस भारी-भरकम रकम के कागजात खंगालने में जुटे हैं।
फर्जी बिल और हवाला का खेल आया सामने
आयकर अफसरों को जांच में कुछ ऐसे व्हाट्सऐप चैट और डिजिटल सबूत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि बड़े पैमाने पर हवाला के जरिए पैसों का लेन-देन किया गया है।
टैक्स बचाने के लिए करोड़ों रुपये के फर्जी बिलों का सहारा लिया गया। कई बेनामी संपत्तियों के बारे में जानकारी मिली है, जिसकी जांच जारी है। जब्त किए गए लैपटॉप, हार्ड ड्राइव और फर्जी बिलों का सच जानने के लिए दिल्ली और कोलकाता से फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स बुलाए गए हैं।
तीन राज्यों में 200 से ज्यादा अफसरों का धावा
यह बड़ी कार्रवाई रांची, बेगुसराय और गुरुग्राम में एक साथ चल रही है, जिसमें 200 से अधिक अधिकारी और सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। रांची कचहरी रोड स्थित पंचवटी प्लाजा का ऑफिस, बिहार के बेगुसराय के कृष्णा नगर का ऑफिस तथा गुरुग्राम सेक्टर-54 सनसिटी शॉपिंग आर्केड का कॉर्पोरेट ऑफिस- इन ठिकानों पर सर्वे किय़ा गया।
इन कंपनियों पर कार्रवाई
इस छापेमारी के दायरे में समूह की कई बड़ी कंपनियां आई हैं। इनमें मेसर्स रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन (RKSC), आयुष श्रेयस प्रॉपर्टी प्रालि. (ASPPL), RKSCPL इंफ्रा प्रालि. (RIPL), RKSCPL प्रोजेक्ट प्रालि. (RPPL)।
यह ग्रुप नेशनल हाईवे (NHAI) की सड़कें, बड़े स्टेडियम, बिल्डिंग्स, पुल और माइनिंग से जुड़े बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स पर काम करता है। अधिकारियों का मानना है कि जब्त कागजों की पूरी पड़ताल के बाद इस मामले में अभी कई और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।
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