
जमशेदपुर : बेंगलुरु में आयोजित राष्टीय इंटक के दो दिवसीय अधिवेशन में इस्पात उद्योग, ईपीएस-95 पेंशनरों एवं समर्पित रेलवे फ्रेट कॉरिडोर का मामला छाया रहा। इसी मामले को लेकर अधिवेशन के दूसरे दिन से पहुंचें दर्जनों इंटक नेताओं ने अपने राष्टीय अध्यक्ष को एक ज्ञापन सौंपा सौंपा जो इस प्रकार है।
1. इस्पात आयात पर वर्तमान में लागू एंटी-डंपिंग ड्यूटी को निरंतर जारी रखा जाए, ताकि भारतीय इस्पात उद्योग को सस्ते एवं अनुचित विदेशी आयात से संरक्षण मिलता रहे तथा लाखों श्रमिकों के रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
2. कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) के अंतर्गत उच्च पेंशन की गणना में अपनाई जा रही प्रो-राटा (Pro-rata) प्रणाली को समाप्त किया जाए तथा सभी पात्र पेंशनरों को वास्तविक पेंशन योग्य वेतन के आधार पर उच्च पेंशन एवं लंबित एरियर का भुगतान सुनिश्चित किया जाए
3. भारतीय इस्पात उद्योग के लिए समर्पित रेलवे फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Railway Freight Corridor) का शीघ्र विकास एवं विस्तार किया जाए, ताकि लौह अयस्क, कोयला एवं तैयार इस्पात उत्पादों का परिवहन तेज, किफायती और प्रतिस्पर्धी बन सके। इससे लॉजिस्टिक लागत कम होगी, भारतीय इस्पात उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी तथा औद्योगिक विकास एवं रोजगार सृजन को नई गति मिलेगी।
ज्ञापन में केंद्रीय इंटक नेतृत्व से अनुरोध किया गया कि वह इन सभी महत्वपूर्ण मुद्दों को भारत सरकार के समक्ष प्राथमिकता के आधार पर उठाए तथा शीघ्र समाधान सुनिश्चित कराने के लिए प्रभावी पहल करे। ज्ञापन सौंपने वालों में शहर के इंटक नेता राकेश्वर पांडेय, रघुनाथ पांडेय, आर रवि प्रसाद, बिजय खान,डॉ. शहनवाज़ आलम, संजीव श्रीवास्तव, सतीश सिंह, लेश सिंह, आमोद दुबे, रवि कुमार आदि शामिल थे। नेताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्रीय इंटक श्रमिकों एवं पेंशनरों के इन महत्वपूर्ण मुद्दों को सरकार के समक्ष मजबूती से उठाकर उनके न्यायोचित समाधान के लिए प्रभावी पहल करेगा
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