
Jamshedpur : अर्का जैन यूनिवर्सिटी की तरफ से रविवार को एक्सएलआरआई ऑडिटोरियम में नए विद्यार्थियों के स्वागत के लिए ‘आरंभ’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पटना के सुपर-30 के संस्थापक और पद्मश्री से सम्मानित आनंद कुमार ने विद्यार्थियों को सफलता के लिए हुनर, मेहनत, सकारात्मक सोच और धैर्य को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने स्टुडेंट्स को सफलता के चार मंत्र बताए तो छात्र-छात्राओं ने तालियां बजा कर इन्हें आत्मसात करने का इरादा जाहिर किया।
इस वर्ष अर्का जैन यूनिवर्सिटी में करीब 2400 विद्यार्थियों ने लगभग 35 पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया है। विश्वविद्यालय ने इस वर्ष फोरेंसिक साइंस समेत कई रोजगारपरक और नए दौर की जरूरतों से जुड़े पाठ्यक्रम भी शुरू किए हैं। अर्का जैन यूनिवर्सिटी ने इन नए स्टुडेंट्स के एकेडमिक सेशन की शुरुआत से पहले आरंभ कार्यक्रम आयोजित किया था।

इस कार्यक्रम के चीफ गेस्ट आनंद कुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दौर सिर्फ डिग्री हासिल करने का नहीं, बल्कि अपने अंदर हुनर विकसित करने का है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को यह सोचने के बजाय कि डिग्री मिलने के बाद नौकरी मिल जाएगी, यह सोचना चाहिए कि वे नया क्या कर सकते हैं और समाज व दुनिया के लिए क्या नया तैयार कर सकते हैं।
उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि बचपन में स्वामी विवेकानंद की एक किताब पढ़ी थी, जिसमें यह संदेश मिला कि इंसान के भीतर असाधारण शक्ति होती है। आगे बढ़ने पर उन्हें महसूस हुआ कि स्वामी विवेकानंद की बात बिल्कुल सही थी। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपनी क्षमताओं पर विश्वास करें और बड़े लक्ष्य तय करें।

आनंद कुमार ने कहा कि जीवन में हर व्यक्ति का सपना एक जैसा पूरा हो, यह जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि वह कैंब्रिज यूनिवर्सिटी नहीं जा सके, लेकिन अगर वहां पहुंच गए होते तो शायद आज विद्यार्थियों के सामने खड़े होकर उनसे संवाद नहीं कर रहे होते। इसलिए जीवन में आने वाले बदलाव और असफलताओं को भी आगे बढ़ने का अवसर समझना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जो पढ़ें, शुरू से गंभीरता से पढ़ें और हमेशा इनोवेटिव बने रहें। कोई काम छोटा नहीं होता। व्यक्ति को वही काम करना चाहिए, जिसमें उसकी रुचि हो, लेकिन उसे हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत जरूरी है।
आनंद कुमार ने सफलता का मंत्र बताते हुए कहा कि हमेशा नई सोच के पीछे भागना चाहिए। सफलता के लिए कड़ा परिश्रम, अच्छा व्यवहार और विनम्रता जरूरी है। ईगो से बचना चाहिए और बार-बार असफल होने के बावजूद धैर्य नहीं खोना चाहिए।
उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि पटना में संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। बाद में शोध और अध्ययन के लिए उन्हें दूसरे शहरों का रुख करना पड़ा। मेहनत और जिज्ञासा के बल पर उनका शोध लेख कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के जर्नल में प्रकाशित हुआ। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां कैसी भी हों, सीखने की इच्छा व्यक्ति को आगे ले जाती है।
कार्यक्रम में आनंद कुमार ने सुपर-30 से जुड़े विद्यार्थियों की सफलता की कहानियां भी साझा कीं। उन्होंने अभिषेक राज का उदाहरण देते हुए बताया कि नालंदा के एक गांव से आने वाले अभिषेक के माता-पिता किसान थे। पढ़ाई के लिए वह पटना आया और कठिन परिस्थितियों में मेहनत करता रहा। आज वह टेक्सास की एक बड़ी कंपनी में काम कर रहा है।

इसी तरह उन्होंने शशि नारायण का उदाहरण देते हुए बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले शशि की अंग्रेजी भी बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन मेहनत के दम पर उसका दाखिला आईआईटी खड़गपुर में हुआ और आज वह गूगल में साइंटिस्ट के रूप में काम कर रहा है।
उन्होंने विद्यार्थियों को मोबाइल और सोशल मीडिया के कारण लक्ष्य से भटकने से बचने की सलाह दी। कहा कि जीवन में भटकाव आएगा, लेकिन अपने उद्देश्य से नहीं भटकना चाहिए।
आनंद कुमार ने विद्यार्थियों को सफलता के चार मंत्र बताए—प्रबल प्यास, पॉजिटिव थिंकिंग, अथक प्रयास और असीम धैर्य। उन्होंने कहा कि इन चार चीजों को जीवन में अपनाकर विद्यार्थी अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के निदेशक ने बताया कि जापान की एक यूनिवर्सिटी के साथ अर्का जैन यूनिवर्सिटी का शैक्षणिक तालमेल विकसित किया जाएगा। इसके तहत जापान के विद्यार्थी यहां आएंगे और यहां के विद्यार्थियों को भी जापान जाकर अध्ययन का अवसर मिलेगा।
‘आरंभ’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों के लिए प्रस्तुति भी दी गई और उन्हें उच्च शिक्षा, कौशल विकास तथा नए अवसरों के लिए प्रेरित किया गया।
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