
Jamshedpur : जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास से जुड़ी सरकारी योजनाओं को धरातल पर पहुंचाने में सहिया और आंगनबाड़ी सेविकाओं की अहम भूमिका है। हालांकि, इन दिनों वे भुगतान में देरी समेत कई समस्याओं से जूझ रही हैं। बुधवार को प्रशिक्षण के लिए पहुंचीं कुछ सहिया और सेविकाओं ने अपनी परेशानियां साझा करते हुए विभाग और सरकार से जल्द समाधान की मांग की।
सहिया और सेविकाओं ने बताया कि उन्हें अपने नियमित कार्यों के अलावा कई अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी सौंपी जाती हैं। हाल ही में SIR के तहत उन्हें BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) के रूप में काम करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसी को लेकर प्रशिक्षण आयोजित किया गया था, लेकिन कुछ कर्मियों का प्रशिक्षण छूट गया। अब उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि छूटे हुए प्रशिक्षण का आयोजन कब और किस प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि BLO के रूप में अतिरिक्त काम के लिए अलग से राशि देने की बात कही गई थी, लेकिन काम करने के बावजूद अभी तक उन्हें इसका भुगतान नहीं किया गया है। सहिया और सेविकाओं ने इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
वर्ष 2003 की सूची को लेकर भी असमंजस
सहिया और सेविकाओं ने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति का नाम वर्ष 2003 की सूची में दर्ज है, तो उसके नाम को हटाने का अधिकार किसे है। इस मामले में स्पष्ट जानकारी नहीं होने के कारण उन्हें काम करने में परेशानी हो रही है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग की है।
सात माह से पोषण राशि नहीं मिलने का आरोप
आंगनबाड़ी सेविकाओं ने अपनी सबसे बड़ी समस्या पोषण राशि के भुगतान में देरी को बताया। उनका आरोप है कि बच्चों को दिए जाने वाले पोषण आहार की राशि करीब सात माह से लंबित है। सेविकाओं के अनुसार, एक अंडे के लिए लगभग छह रुपये की राशि निर्धारित है, जबकि बाजार में इसकी कीमत करीब दस रुपये तक पहुंच गई है। ऐसे में निर्धारित राशि में बच्चों के लिए पोषण सामग्री उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है।
सेविकाओं का कहना है कि केंद्रों का संचालन, बच्चों को पोषण उपलब्ध कराना और सरकार की विभिन्न योजनाओं को लागू करना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन समय पर राशि नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मानदेय में देरी से भी बढ़ी परेशानी
सहिया और सेविकाओं ने बताया कि उनका मानदेय भी समय पर नहीं मिलता। उनका कहना है कि जब मानदेय और पोषण राशि दोनों का भुगतान समय पर नहीं हो, तो रोजमर्रा के खर्च के साथ केंद्र से जुड़े कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करना कठिन हो जाता है।
उन्होंने कहा कि चुनावी कार्य, स्वास्थ्य विभाग की गतिविधियां और महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं समेत कई सरकारी कार्यक्रमों को गांव और घर-घर तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसके बावजूद भुगतान में लगातार देरी उनकी परेशानी बढ़ा रही है।
लंबित भुगतान जल्द करने की मांग
सहिया और आंगनबाड़ी सेविकाओं ने सरकार तथा संबंधित विभाग के अधिकारियों से लंबित पोषण राशि और मानदेय का जल्द भुगतान करने की मांग की है। साथ ही BLO के रूप में किए जा रहे अतिरिक्त कार्य के लिए निर्धारित राशि का भुगतान सुनिश्चित करने की अपील की है।
उनका कहना है कि समय पर भुगतान और स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलने से वे अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभा सकेंगी और सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में आ रही परेशानियां भी कम होंगी।

