
रांची : पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) जिले में मलेरिया से हुई मौत और बढ़ते मामलों के बाद झारखंड सरकार पूरी तरह अलर्ट हो गई है। राज्य में मलेरिया फैलने से रोकने के लिए सरकार ने सभी जिलों में अभियान चलाने का फैसला किया है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बुधवार को राज्य के सभी उपायुक्तों (डीसी) को एक पत्र जारी कर तुरंत सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
घर-घर जाकर की जाएगी मरीजों की पहचान
सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि जिन इलाकों में मलेरिया के मरीज मिल रहे हैं, वहां खास नजर रखी जाए। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं MPW और सहियाओं की मदद से प्रभावित इलाकों में घर-घर जाकर सर्वे किया जाएगा। अगर किसी को भी बुखार है,तो उसकी तुरंत जांच की जाएगी। जांच में मलेरिया की पुष्टि होते ही मरीज का इलाज बिना किसी देरी के शुरू कर दिया जाएगा। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने और उनके ठीक होने तक पूरी देखरेख करने की जिम्मेदारी दी गई है।
गांवों में बांटी जाएंगी दवाएं
अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि जैसे ही कोई नया मलेरिया का मरीज मिले,उस पूरे इलाके में बुखार की जांच का अभियान चलाया जाए। जिन गांवों में मलेरिया का असर ज्यादा है, वहां की सहियाओं को तुरंत रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट किट और मलेरिया की जरूरी दवाएं दी जाएंगी। इसके अलावा सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं और जांच किट का पर्याप्त स्टॉक रखने को कहा गया है। मच्छरों को खत्म करने के लिए प्रभावित इलाकों में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव और एंटी-लार्वा अभियान तेज किया जाएगा।
बड़े अधिकारी खुद संभालेंगे कमान
मलेरिया की रोकथाम के लिए इस बार सरकार ने तीन स्तरों पर निगरानी करने का फैसला लिया है। अपर मुख्य सचिव ने सभी जिलों के उपायुक्तों से कहा है कि वे खुद इस पूरे अभियान पर नजर रखें। स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर बाकी विभागों से तालमेल बिठाएं, ताकि मलेरिया को जल्द से जल्द काबू में किया जा सके और किसी भी मरीज की जान न जाए। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सही समय पर जांच, तुरंत इलाज और लोगों में जागरूकता फैलाकर मलेरिया को पूरी तरह से रोका जा सकता है।

