
रांची : कार्य पूर्ण होने के तीन साल बाद भी ठेकेदार को भुगतान नहीं किया गया। मामले को झारखंड हाई कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।
मामले में सुनवाई करते हुए झारखंड उच्च न्यायालय ने सरकारी कार्य पूरा होने के बावजूद करीब तीन वर्षों तक ठेकेदार का भुगतान लंबित रखने पर नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति अनंदा सेन की एकल पीठ ने राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जताते हुए दो सप्ताह के भीतर बकाया भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। अदालत ने राज्य सरकार से अनुपालन रिपोर्ट भी तलब की है। अब अगली सुनवाई छह अगस्त को निर्धारित है।
अजोम मोटीवेट की ओर से याचिका की गई थी जिस पर बुधवार को सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने बताया कि बोकारो में सोलर सिंचाई योजना के तहत आवंटित कार्य करीब तीन वर्ष पहले पूरा कर दिया गया था, लेकिन अब तक संबंधित विभाग ने भुगतान नहीं किया है।
याचिकाकर्ता के वकील अफसर रजा ने कोर्ट को बताया कि बोकारो में सोलर सिंचाई योजना के तहत मिला काम तीन साल पहले ही पूरा हो चुका था। इसके बावजूद विभाग पैसे नहीं दे रहा है, जो कि पूरी तरह से मनमानी है। वहीं, राज्य सरकार की दलील थी कि यह योजना केंद्र सरकार के फंड से जुड़ी थी और बजट न होने के कारण भुगतान अटक गया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से सरकार को आड़े हाथों लिया। मुफ्त की योजनाओं पर तंज कसते हुए अदालत ने कहा कि सरकार को मुफ्त की चीजें बांटने वाली योजनाओं पर विचार करने से पहले अपने जरूरी वित्तीय दायित्वों को पूरा करना चाहिए, ताकि ऐसी स्थिति पैदा ही न हो।
कोर्ट ने साफ कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच पैसे के तालमेल की कमी या किसी विवाद का नुकसान किसी तीसरे पक्ष यानी ठेकेदार को नहीं भुगतना चाहिए।
जस्टिस अनंदा सेन ने महाधिवक्ता से कहा कि वे संबंधित विभागों से बात करें और जिन लोगों का काम पूरा हो चुका है, उनका भुगतान जल्द से जल्द कराएं। समय पर पैसा न मिलने से ठेकेदारों के अधिकारों का हनन होता है और सरकारी कामों पर भी बुरा असर पड़ता है।

