
रांची: झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी में नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे अभ्यर्थियों को हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने भर्ती प्रक्रिया रद्द करने के जेएसएलपीएस के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है। मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की सिंगल बेंच ने अभ्यर्थियों की ओर से दाखिल की गई याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया।
अदालत ने अपने फैसले में कहीं ये बातें
हाई कोर्ट ने अपना रुख साफ करते हुए कहा कि सिर्फ किसी परीक्षा में शामिल होने या उसके शुरुआती चरण पास कर लेने भर से किसी भी उम्मीदवार को नौकरी पाने का कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता। अदालत ने 6 मई 2025 को जारी जेएसएलपीएस के उस आदेश को जायज ठहराया, जिसके तहत जनवरी 2022 में निकाली गई भर्ती को रद्द कर दिया गया था।
क्या था पूरा मामला और अभ्यर्थियों का तर्क
शशि रंजन और अन्य अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया रद्द किए जाने के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे सितंबर 2022 में हुई लिखित परीक्षा में पास हुए थे। इसके बाद उन्होंने ग्रुप डिस्कशन और पर्सनल इंटरव्यू भी दिया था।
पूरी प्रक्रिया अंतिम दौर में पहुंच चुकी थी, लेकिन फिर भी जेएसएलपीएस ने परिणाम जारी करने के बजाय भर्ती रद्द कर दी। अभ्यर्थियों की दलील थी कि बिना किसी ठोस वजह के पूरी प्रक्रिया को अचानक रद्द करना गलत और अन्यायपूर्ण है।
JSLPS ने अदालत में दी सफाई
जेएसएलपीएस की ओर से अदालत में बताया गया कि ये सभी पद अलग-अलग सरकारी परियोजनाओं (जैसे ‘जोहार’ और ‘NRETP’) के तहत संविदा के आधार पर निकाले गए थे।
भर्ती प्रक्रिया काफी समय तक पेंडिंग रही, जिस दौरान जून और जुलाई 2023 में ये प्रोजेक्ट ही खत्म हो गए। ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से भी प्रोजेक्ट पूरे होने की जानकारी मिल चुकी थी। जब प्रोजेक्ट ही बंद हो गए, तो उन पदों की जरूरत भी खत्म हो गई। इसके अलावा एजेंसी में बदलाव और प्रशासनिक वजहों से भर्ती को रद्द करने का फैसला लेना पड़ा।
मामले के सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने जेएसएलपीएस के तर्कों को सही माना और अभ्यर्थियों की याचिका को खारिज कर दिया।

