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Supreme Court Order : बिहार-झारखंड की 5 बंद सरकारी कंपनियों के मजदूरों की जगी आस, मिलेगा 1 लाख का एक्स्ट्रा तोहफा और ब्याज!

हजारों कर्मचारियों के हक में देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जानिए अब किसको और कैसे मिलेगी बकाया राशि

by Kanchan Kumar
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​नई दिल्ली / रांची : ​झारखंड और बिहार की बंद हो चुकी पांच सरकारी कंपनियों (निगमों) में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों और दैनिक मजदूरों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी और खुश कर देने वाली खबर आई है। वर्षों से अपने हक के पैसों का इंतजार कर रहे इन कर्मचारियों को राहत देते हुए अदालत ने दोनों राज्य सरकारों को बड़ा आदेश दिया है।

​सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जितने भी पात्र दैनिक वेतनभोगी हैं, उन्हें पहले से तय राशि के अलावा 1-1 लाख रुपये का अतिरिक्त एकमुश्त भुगतान किया जाए। इसके साथ ही, कर्मचारियों के कर्मचारी भविष्य निधि के बकाया पैसों पर 12 प्रतिशत का साधारण ब्याज और बाकी वेतन या वित्तीय देनदारियों पर 6 प्रतिशत का ब्याज देने का निर्देश दिया गया है।

​अदालत ने क्यों लिया यह फैसला

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि साल 2000 में बिहार से झारखंड के अलग होने के बाद से ही दोनों राज्यों के बीच बकाए और देनदारियों को लेकर खींचतान चल रही थी। इस लंबे खिंचते विवाद को हमेशा के लिए खत्म करने और गरीब कामगारों को उनका वाजिब हक दिलाने के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी था।

इन कंपनियों के कर्मचारियों को मिलेगा फायदा

यह पूरा मामला बिहार और झारखंड की उन पांच अंतरराज्यीय सरकारी कंपनियों से जुड़ा है जो अब बंद हो चुकी हैं। ये हैं-
​बिहार स्टेट कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड
​बिहार स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड
​बिहार स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड
​बिहार स्टेट फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड
​बिहार स्टेट पंचायती राज फाइनेंशियल कॉरपोरेशन लिमिटेड

​इसके अलावा, झारखंड स्थित ‘ईईएफ इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट फैक्ट्री के कर्मचारियों को भी इस फैसले से सीधा फायदा पहुंचेगा।

​मजदूरों की दिहाड़ी पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख

सुनवाई के दौरान जब राज्यों ने तर्क दिया कि कुछ मजदूरों की मजदूरी की गिनती 1992 की पुरानी दर 42.50 रुपये प्रति दिन के हिसाब से की जा रही है, तो सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सख्त नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि दशकों पुराने ढर्रे पर आज के समय में भुगतान करना पूरी तरह गलत है। समय के साथ महंगाई बढ़ी है, इसलिए इतने सालों बाद भी पुरानी स्थिर दरों पर मजदूरी का हिसाब लगाना कहीं से भी सही नहीं ठहराया जा सकता।

​200 लोगों का भुगतान अभी भी अटका

कोर्ट के सामने पेश आंकड़ों के मुताबिक, कुल 2,274 सत्यापित कर्मचारियों में से 2,074 लोगों को उनकी मूल रकम मिल चुकी है। हालांकि, लगभग 200 कर्मचारियों या उनके परिजनों का पता न चलने और जरूरी कागज न होने की वजह से पैसा अटका हुआ है। अदालत ने ऐसे कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए कहा कि वे अगले 12 महीनों के भीतर अपने जरूरी दस्तावेज जमा करके नोडल अफसर के जरिए अपने पैसे का दावा कर सकते हैं।

​वेबसाइट पर सार्वजनिक होगी पूरी जानकारी

पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अदालत ने दोनों राज्यों को 4 हफ्ते का अल्टीमेटम दिया है। अब बिहार और झारखंड सरकार को अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर यह सूची अपलोड करनी होगी कि किस कर्मचारी को कितना पैसा मिला है और जिनका पैसा रुका है, उसकी वजह क्या है। इस फैसले से वर्षों से भटक रहे पीड़ित परिवारों को अब उनका न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
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