
रांची: शिक्षकों को एमएसीपी (मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) का लाभ नहीं दिए जाने के विरोध में रविवार को झारखंड ऑफिसर्स, टीचर्स एंड एम्प्लॉइज फेडरेशन (झारोटेफ) के आह्वान पर राज्यभर में एमएसीपी अधिकार–प्रतिवाद दिवस मनाया गया। इस दौरान विभिन्न जिलों और प्रखंडों में शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने लंच आवर के दौरान एकत्र होकर शिक्षा विभाग के आदेश के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया तथा आदेश की प्रतीकात्मक प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया।
महासंघ ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग का यह आदेश सरकार के पूर्व आश्वासनों और सत्तारूढ़ दल के चुनावी घोषणा-पत्र के विपरीत है। संगठन का कहना है कि विधानसभा में भी सरकार की ओर से शिक्षकों को अन्य राज्यकर्मियों की तरह एमएसीपी का लाभ देने का सकारात्मक आश्वासन दिया गया था, लेकिन विभागीय आदेश में उन्हें इससे वंचित रखा गया है।
झारोटेफ के प्रांतीय अध्यक्ष विक्रांत कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षकों को एमएसीपी से वंचित रखने का निर्णय न तो न्यायसंगत है और न ही समानता के सिद्धांत के अनुरूप। उन्होंने सरकार से विभागीय आदेश की तत्काल समीक्षा कर शिक्षकों को अन्य राज्यकर्मियों के समान एमएसीपी का लाभ देने की मांग की।
प्रांतीय महासचिव उज्जवल कुमार तिवारी ने कहा कि राज्यव्यापी प्रतिवाद कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षक और कर्मचारी अपने अधिकारों के मुद्दे पर एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि संगठन का आंदोलन किसी व्यक्ति या सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि न्याय, समानता और सरकार द्वारा किए गए वादों को लागू कराने के लिए है।
महासंघ ने बताया कि विरोध कार्यक्रम के साथ-साथ सोशल मीडिया मंचों पर भी व्यापक अभियान चलाकर सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया गया। संगठन ने राज्य सरकार से शिक्षा विभाग का आदेश वापस लेने और शिक्षकों को एमएसीपी का लाभ देने की मांग दोहराई।
महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो चरणबद्ध आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसके तहत “पाएं अपना अधिकार, चलो मुख्यमंत्री के द्वार” अभियान के तहत हजारों शिक्षक, कर्मचारी और अधिकारी मुख्यमंत्री आवास तक शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक मार्च करेंगे।

