
रांची: कड़ी मेहनत से सिविल सेवा परीक्षा पास की, मेरिट लिस्ट में नाम आया और राज्य प्रशासनिक सेवा में उप समाहर्ता बनने का सुनहरा सपना साकार होने ही वाला था। लेकिन सिर्फ एक लापरवाही -डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन न कराना,दो अभ्यर्थियों को भारी पड़ गया। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा में सफल हुए सुनील दास और आर्यन का चयन कार्मिक विभाग ने अंतिम रूप से रद्द कर दिया है।
बार-बार दिए गए मौके, पर नहीं पहुंचे अभ्यर्थी
कार्मिक विभाग ने अभ्यर्थियों को अपने शैक्षणिक, जाति और आवासीय प्रमाण पत्रों की जांच कराने के लिए एक-दो नहीं, बल्कि कई मौके दिए।
पहला मौका : दोनों अभ्यर्थियों को 19 और 20 अगस्त को मूल दस्तावेजों के साथ बुलाया गया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए।
दूसरा मौका : विभाग ने राहत देते हुए 28 अगस्त को दोबारा तिथि तय की, पर इस बार भी कोई अभ्यर्थी नहीं पहुंचा।
अंतिम अवसर : अभ्यर्थी सुनील दास ने वर्तमान नौकरी से त्यागपत्र देने का हवाला देकर 6 महीने का अतिरिक्त समय मांगा था। कार्मिक विभाग ने उन्हें अंतिम मौका दिया, मगर वह फिर भी अनुपस्थित रहे।
नियमों के तहत लिया गया कड़ा फैसला
लगातार मिलते मौकों के बावजूद जब दोनों अभ्यर्थी वेरिफिकेशन के लिए नहीं पहुंचे और न ही कोई स्पष्ट सूचना दी, तो कार्मिक विभाग को सख्त कदम उठाना पड़ा।
’झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा नियमावली 2021′ के नियम 37 के तहत विभाग ने कार्रवाई करते हुए दोनों अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा तुरंत प्रभाव से रद्द कर दी। सुनील दास का चयन अनुसूचित जाति कोटि और आर्यन का चयन अनारक्षित कोटि के तहत उप समाहर्ता पद के लिए हुआ था।
अधिकारियों का कहना है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में नियमों का पालन अनिवार्य है, और तय सीमा में सत्यापन न कराने पर यह फैसला लिया गया।

