
रांची : झारखंड हाईकोर्ट में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में हुई कथित धांधली से जुड़ी याचिकाओं पर अहम सुनवाई हुई। जस्टिस दीपक रोशन की पीठ ने राज्य सरकार द्वारा सीलबंद लिफाफे में पेश की गई सीआईडी जांच की स्टेटस रिपोर्ट का अवलोकन किया।
रिपोर्ट देखने के बाद अदालत ने जांच की सुस्त पड़ती चाल पर नाराजगी जाहिर की और कहा कि यह मामला ढाई हजार से अधिक युवाओं के करियर से जुड़ा है, इसलिए जांच में ढिलाई बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
राज्य सरकार ने विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए 4 सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा था। लेकिन अदालत ने राहत देने से इनकार करते हुए सिर्फ 48 घंटे के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
जांच का दायरा होना चाहिए पारदर्शी और सटीक
पीठ ने टिप्पणी की कि पूरी प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका के बावजूद सभी अभ्यर्थियों को एक ही तराजू में नहीं तोला जा सकता। कई उम्मीदवार पूरी तरह ईमानदार हो सकते हैं, इसलिए जांच का दायरा पारदर्शी और सटीक होना चाहिए।
CID द्वारा सौंपी गई प्रगति रिपोर्ट को कोर्ट ने दोबारा सील कर रिकॉर्ड में रख लिया है और इसकी प्रति याचिकाकर्ताओं के वकीलों को देने से मना कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका प्राथमिक उद्देश्य भर्ती रद्द करने वाली सरकारी अधिसूचना की संवैधानिक और कानूनी वैधता को परखना है।
मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को तय की गई है। तब तक प्रभावित अभ्यर्थियों को दी गई अंतरिम राहत प्रभावी रहेगी।

