
रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में हुई धांधली और OMR शीट के खेल में सीआईडी की जांच अब काफी तेज हो गई है। शुक्रवार को CID की टीम ने आयोग की पूर्व सदस्य डॉ. अनिमा हांसदा को बुलाकर लंबी पूछताछ की।
हालांकि, डॉ. अनिमा ने पूरे मामले से खुद को अलग करते हुए सफाई दी कि उन्हें इस गड़बड़ी की कोई भनक नहीं थी और इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। जब परीक्षा कराने वाली एजेंसी TDPL के चयन पर सवाल हुआ, तो उन्होंने सारा जिम्मा पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते के सिर डाल दिया।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक काम देखना उनकी जिम्मेदारी थी, लेकिन अंदर ही अंदर क्या खेल चल रहा था, इसकी जानकारी उन्हें नहीं मिल सकी।
दो अन्य सदस्यों से भी हो चुकी है पूछताछ
इससे पहले CID ने डॉ. अजिता भट्टाचार्य और डॉ. जमाल अहमद से पूछताछ की थी। गिरफ्तार आरोपियों ने दावा किया था कि इन दोनों सदस्यों के एजेंट थे, जो अभ्यर्थियों से पास कराने के नाम पर पैसे वसूलते थे।
डॉ. अनिमा को राहत: फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों के बयानों में डॉ. अनिमा हांसदा के खिलाफ कोई सीधी बात सामने नहीं आई है।
5 जिलों में छापेमारी, 7 वांटेड एजेंटों की तलाश
इसे अब उन 7 बिचौलियों और कोचिंग संचालकों के पीछे पड़ी है जो अभ्यर्थियों को सेटिंग का झांसा देकर मोटी रकम वसूलते थे।
इनके खिलाफ कोर्ट से जारी है गिरफ्तारी वारंट
- रांची: आदित्य पांडेय (नामकुम) और पवन कुमार सिंह (टाटीसिलवे)
- पलामू: रवि शंकर कुमार और संतोष कुमार सिंह
- बोकारो: सानंद प्रकाश
- हजारीबाग: लालू कुमार यादव
- गिरिडीह: सौरभ कुमार पांडेय
CID का साफ कहना है कि अगर इन सातों ने जल्द से जल्द सरेंडर नहीं किया, तो इनकी संपत्ति कुर्की-जब्ती की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
आमने-सामने बैठाकर पूछताछ: 2 करोड़ का सौदा!
मामले की गहराई तक जाने के लिए CID ने पूर्व अध्यक्ष के कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र और बिंसिस कंपनी के डायरेक्टर अरुण शर्मा को रिमांड पर लेकर आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की।
धर्मेंद्र ने माना कि पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते उस पर बहुत भरोसा करते थे। वह वसूली से लेकर एजेंसियों की सेटिंग तक का काम देखता था।
अरुण ने स्वीकारा कि JPSC का काम पाने के लिए 2 करोड़ रुपये में डील पक्की हुई थी, और यह सौदा धर्मेंद्र ने ही तय कराया था।
454 अभ्यर्थी CID के रडार पर
जेपीएससी संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा 2025 की OMR शीट जांच का काम भी जोरों पर है। सीआईडी ने पास हुए छात्रों से OMR शीट की कार्बन कॉपी मांगी थी।
- कुल 1,750 OMR शीट CID को मिल चुकी हैं, जिनकी जांच चल रही है।
- कुल 2,204 पास छात्रों में से 454 अभ्यर्थियों ने अब तक OMR शीट नहीं भेजी है।
- CID अब इन 454 छात्रों को संदिग्ध मानकर उनके खिलाफ अलग से जांच कर रही है।


