Jamshedpur : सुंदरनगर स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में मंगलवार को हुए औचक निरीक्षण के दौरान उस समय जमकर हंगामा हुआ जब वार्डेन स्कूल का निरीक्षण करने आए पोटका के विधायक संजीव सरदार को नहीं पहचान पाईं। वार्डेन ने विधायक से पूछा आप कौन हैं। क्यों यहां आए हैं। स्कूल के अंदर कैसे घुसे। इसे लेकर विधायक और वार्डेन के बीच जमकर बहस हुई।खूब बवाल हुआ। विधायक संजीव सरदार का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उन्होंने फौरन डीईओ मनोज कुमार को फोन लगा कर बताया कि कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की वार्डेन उन्हें नहीं पहचान पा रही हैं। इसके बाद डीईओ ने वार्डेन ने फोन किया तब जाकर माहौल सामान्य हुआ। इसके बाद विधायक ने विद्यालय का निरीक्षण किया, जिसमें भारी अनियमितता सामने आई है। कक्षा 10 की क्लास में 68 छात्राएं थीं मगर, शिक्षक नदारद थे। कक्षा 11 और 12 की छात्राएं साामन्य सवालों का जवाब नहीं दे सकीं। इससे स्कूल में पढ़ाई के गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
डीईओ ने दिए जांच के आदेश

वार्डेन ने सफाई दी है कि वह विधायक संजीव सरदार से चार साल पहले साल 2022 में मिली थीं। इस वजह से नहीं पहचान सकीं। उन्होंने इसके लिए अपनी गलती भी मानीं। बाद में विधायक ने विद्यालय का जायजा लिया जिसमें भारी अनियमितताएं सामने आने की बात कही है। हालांकि, स्कूल प्रबंधन का कहना है विद्यालय में कक्षा 11 की प्रवेश परीक्षा चल रही थी। इस वजह से कई कक्षाएं सस्पेंड कर दी गई थीं। यही वजह है कि कुछ शिक्षक नहीं थे। हालांकि, डीईओ मनोज कुमार ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। उनका कहना है कि विधायक की तरफ से जो भी शिकायत आई है उस मामले की जांच कराई जाएगी।
पोटका के विधायक संजीव सरदार का कहना है कि जब वह स्कूल पहुंचे तो यहां व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। कक्षाओं में शिक्षक गायब, छात्राएं सवालों के जवाब देने में असमर्थ और किचन में गंदगी का अंबार मिला। निरीक्षण के दौरान करीब 10:30 बजे स्कूल पहुंचने पर 12 वर्षों से कार्यरत वार्डेन रीना कुमारी सिंह विधायक को पहचान नहीं सकीं और उनसे नाम पूछ बैठीं। विधायक द्वारा परिचय देने के बावजूद वार्डेन ने उन्हें नहीं पहचानने की बात कही, जिससे माहौल कुछ देर के लिए गर्म हो गया। विधायक संजीव सरदार ने बताया कि इस स्कूल में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी मिली है। साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता। टीचर पढ़ाई के बजाए गायब रहते हैं। छात्राओं को सामान्य सवालों के भी जवाब नहीं मालूम। विधायक ने कहा कि वह इस पूरे मामले से शिक्षा मंत्री को अवगत कराएंगे। उन्होंने कहा कि छात्राओं की शिक्षा के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
कक्षा में शिक्षक नदारद, छात्राएं नहीं दे सकीं जवाब
विधायक जब कक्षा 12 में पहुंचे तो वहां छात्राएं मौजूद थीं, लेकिन शिक्षक अनुपस्थित थे। छात्राओं से जब झारखंड और भारत की जनसंख्या से जुड़े सामान्य प्रश्न पूछे गए, तो 40 में से एक भी छात्रा जवाब नहीं दे सकी। कक्षा 11 की स्थिति भी कुछ ऐसी ही रही। कक्षा 10 में 68 छात्राएं मौजूद थीं, लेकिन वहां भी कोई शिक्षक नहीं मिला। कई कक्षाएं पूरी तरह खाली पाई गईं। इस पर विधायक ने नाराजगी जताते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी मनोज कुमार को जानकारी दी और वार्डेन से तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा। विधायक ने कहा कि स्कूल में 22 टीचरों की तैनाती है। मगर, कक्षा में यह टीचर नहीं नजर आए।
किचन में गंदगी से स्वास्थ्य पर खतरा

विद्यालय के किचन का निरीक्षण करने पर गंदगी और मक्खियों का जमावड़ा देखकर विधायक भड़क उठे। उन्होंने कहा कि इस तरह के माहौल में बना भोजन छात्राओं के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। उन्होंने रसोइयों और स्कूल प्रबंधन को साफ-सफाई और गुणवत्ता सुधारने के निर्देश दिए। विधायक ने कहा कि इस तरफ वार्डेन का ध्यान क्यों नहीं गया है। आखिर इसकी वजह क्या है।
एडमिशन में गड़बड़ी के आरोप
निरीक्षण के दौरान पुड़िहासा गांव के भोक्ता हांसदा ने विधायक से शिकायत की कि बीपीएल परिवार से होने के बावजूद उनकी बेटी का नामांकन नहीं किया गया, जबकि नियमों को दरकिनार कर अन्य छात्राओं का दाखिला लिया गया। अभिभावकों ने वार्डन पर मनमानी का आरोप लगाया। इस पर विधायक ने जांच कराने का आश्वासन दिया।
शिक्षा और स्वास्थ्य से समझौता नहीं : विधायक
निरीक्षण के बाद विधायक संजीव सरदार ने कहा कि ग्रामीणों और अभिभावकों की शिकायतें सही पाई गई हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल में 22 शिक्षक पदस्थापित हैं, लेकिन कक्षाओं में उनकी उपस्थिति नहीं है, जिससे छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। किचन की स्थिति भी बेहद खराब है। उन्होंने जिला प्रशासन को तत्काल जांच कर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए और कहा कि पूरे मामले की जानकारी राज्य के शिक्षा मंत्री को भी दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्राओं की शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कोट
विधायक को वार्डेन नहीं पहचान सकीं। उन्होंने अपनी गलती मान ली है। वार्डेन ने कहा है कि उनसे गलती हो गई है। स्कूल में कक्षा 11 की प्रवेश परीक्षा को लेकर कई कक्षाएं सस्पेंड कर दी गई थीं। इसी वजह से कुछ टीचर नहीं थे।
मनोज कुमार, डीईओ पूर्वी सिंहभूम

