
चाईबासा : विश्व आदिवासी दिवस के पूर्व कोल्हान विश्वविद्यालय में शनिवार को विशेष समारोह का आयोजन हुआ। कार्यक्रम मानवशास्त्र, इतिहास, भूगर्भ और भूगोल विभागों के संयुक्त तत्वावधान में वीर शहीद पोटो हो सभागार में हुआ। जिसकी अध्यक्षता कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता ने की। मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. जानुम सिंह सोय, सम्मानित अतिथि प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. ज्यां द्रेज़, विशिष्ट अतिथि साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त भोगला सोरेन और अनुपम पूर्ति शामिल हुए। साथ ही कुलसचिव डॉ. अमर कुमार, शिक्षक, शोधार्थी, छात्र और विभिन्न समुदायों के गणमान्य लोग मौजूद रहे।
क्या कहा वक्ताओं ने
डॉ. जानुम सिंह सोय ने हो भाषा में संबोधन देते हुए युवाओं से अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहने की अपील की। उन्होंने हो गीत के जरिए सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का संदेश दिया।
आदिवासी समाज में भेदभाव और अनावश्यक ऊंच-नीच नहीं: डॉ ज्यां द्रेज़
डॉ. ज्यां द्रेज़ ने कहा कि आदिवासी समाज में भेदभाव और अनावश्यक ऊंच-नीच नहीं है। आज भी आदिवासी समुदाय *साझी संस्कृति, सामूहिक जीवन और सामुदायिक मूल्यों के जरिए पूरे समाज को दिशा दे रहा है।
वैश्वीकरण के कारण भाषा, संस्कृति और सामुदायिक जीवन पर पड़ रहे असर पर चिंता जताई: सोरेन
भोगला सोरेन ने वैश्वीकरण के कारण भाषा, संस्कृति और सामुदायिक जीवन पर पड़ रहे असर पर चिंता जताई। उन्होंने सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं के संरक्षण पर जोर दिया।
कला प्रदर्शनी और ‘सुकुन बुरु’ आकर्षण का केंद्र
इस दौरान आदिवासी कला-संस्कृति और चित्रकला प्रदर्शनी लगाई गई। अनुपम पूर्ति, डॉ. अभिजीत मुंडा, हरे कृष्णा और रवि मुंडू की कलाकृतियों को लोगों ने सराहा। प्रदर्शनी में आदिवासी जीवन, प्रकृति और सामुदायिक संबंधों को दिखाया गया।अनुपम पूर्ति ने सुकुन बुरु’ प्रस्तुति में बताया कि आदिवासी जीवन में प्रकृति सिर्फ संसाधन नहीं, बल्कि जीवन और संस्कृति का हिस्सा है।
विश्वविद्यालय आदिवासी भाषा, कला, परंपरा और पारंपरिक ज्ञान को सहेजने के लिए काम कर रहा: कुलपति
कुलपति डॉ. अंजिला गुप्ता ने कहा कि विश्वविद्यालय आदिवासी भाषा, कला, परंपरा और पारंपरिक ज्ञान को सहेजने के लिए काम कर रहा है। इन ज्ञान परंपराओं को शिक्षा और शोध से जोड़कर युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से परिचित कराया जाएगा। कार्यक्रम की संयोजक डॉ. मीनाक्षी मुंडा और सह-संयोजक डॉ. अरविंद कुमार रहे। धन्यवाद ज्ञापन रिंकी दोराई ने किया।

