
चाईबासा : कोल्हान विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग में बुधवार को जयतु संस्कृतम् वन्दे संस्कृतम् के उद्घोष के साथ देवभाषा संस्कृत विशेष संवाद वर्ग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य संस्कृत भाषा की वर्तमान दशा एवं दिशा पर सार्थक संवाद स्थापित करना, उसके संरक्षण एवं संवर्धन के उपायों पर विचार करना तथा संस्कृत को जनभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने की दिशा में जन-जागरूकता उत्पन्न करना था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीशदेव पुजारी तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. दीपचंद राम कश्यप रहे। अतिथियों का छात्राओं द्वारा चन्दन-तिलक एवं पुष्पार्चन से पारम्परिक स्वागत किया गया। तत्पश्चात् दीप प्रज्वलन एवं वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. निवारण महथा ने अतिथियों का परिचय प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम की विषयवस्तु पर प्रकाश डाला। विभाग की ओर से मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि को पुस्तक तथा अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
संस्कृत भारतीय ज्ञान, संस्कृति एवं जीवन-दर्शन की आधारशिला
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में मुख्य अतिथि श्रीशदेव पुजारी ने संस्कृत भाषा, संस्कृत साहित्य तथा शुद्ध संस्कृत उच्चारण के महत्त्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, संस्कृति एवं जीवन-दर्शन की आधारशिला है। उन्होंने विद्यार्थियों से संस्कृत के नियमित अध्ययन, शुद्ध उच्चारण के अभ्यास तथा इसके व्यावहारिक प्रयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
भगवद्गीता ग्रन्थ भेंट कर भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को आत्मसात करने का दिया संदेश
विशिष्ट अतिथि डॉ. दीपचंद राम कश्यप ने भी संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन में युवाओं की सक्रिय भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए तथा विद्यार्थियों को भगवद्गीता ग्रन्थ भेंट कर भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को आत्मसात करने का संदेश दिया। कार्यक्रम में स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग एवं महिला महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए सरस्वती वन्दना, स्वागत-गीत, संस्कृत गायत्री मंत्र, “कालिदासो जने जने”, “शूरा वयम्” तथा अन्य सांस्कृतिक एवं वैदिक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को अत्यन्त गरिमामय बनाया।सम्पूर्ण कार्यक्रम का प्रभावशाली एवं सुव्यवस्थित मंच संचालन प्रोफेसर दानगी सोरेन ने किया। उन्होंने शुद्ध, प्रभावशाली एवं प्रवाहपूर्ण संस्कृत भाषा में कार्यक्रम का संचालन कर सभी उपस्थित जनों की सराहना प्राप्त की।
अन्त में विभागाध्यक्ष डॉ. निवारण महथा ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं सहयोगियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। सामूहिक शान्तिपाठ “ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः…” के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह आयोजन संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार, भारतीय ज्ञान-परम्परा के संरक्षण तथा युवा पीढ़ी में संस्कृत के प्रति रुचि एवं जागरूकता विकसित करने की दिशा में अत्यन्त सफल एवं प्रेरणादायी सिद्ध हुआ।
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