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Ramgarh News: पंजाब रेजिमेंटल सेंटर में कुर्की जब्ती का आदेश; भूमि अधिग्रहण मुआवजा नहीं देने पर कोर्ट सख्त

by Kanchan Kumar
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रामगढ़ : सिविल कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। पंजाब रेजिमेंटल सेंटर की संपत्ति कुर्क करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने बेलिफ को कुर्की वारंट सौंपा है। भूमि अधिग्रहण की मुआवजा राशि नहीं देने पर कोर्ट 1.42 करोड़ रुपये वसूली का आदेश दिया है।

कोर्ट के इस फैसले से रक्षा मंत्रालय में हड़कंप मच गया है। सिविल जज सीनियर डिवीजन द्वितीय सह विशेष न्यायाधीश (एलए) शिवेंदु द्विवेदी की अदालत ने शहर की एक भूमि के अधिग्रहण के बाद राशि का भुगतान नहीं करने पर पंजाब रेजिमेंटल सेंटर में कुर्की जब्ती का आदेश जारी किया है।

पंजाब रेजिमेंटल सेंटर रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आता है। इससे मंत्रालय में हड़कंप मच गया है। अदालत ने भूमि अधिग्रहण मुआवजा मामले में मंगलवार को आदेश जारी किया है। उन्होंने 1.42 करोड़ की बकाया राशि वसूली के लिए रक्षा मंत्रालय से संबंधित संपत्ति की कुर्की जब्ती का आदेश जारी किया है। यह आदेश लैंड रिफरेंस के संख्या 26/1990 और संबंधित लैंड एक्विजिशन केस संख्या 01/2005 में पारित किया गया है।

अदालत के अनुसार अवार्डधारकों/ याचिकाकर्ताओं को भुगतान किया जाना था। इसमें मूल मुआवजा राशि और 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज शामिल है। न्यायालय ने कहा कि अब तक कुल 01 करोड 42 लाख 20 हजार 809 रुपये का भुगतान नहीं किया गया है।

अदालत ने बेलिफ को निर्देश दिया है कि वह पंजाब रेजिमेंट सेंटर रामगढ़ कैंट से संबंधित विभिन्न खातों और प्लॉटों की चल संपत्ति को कुर्क करे। संबंधित भूमि रामगढ़ जिले के बुजुर्ग जमीरा और पोचरा गांवों में स्थित बताई गई है।

न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि यदि बकाया राशि और कुर्की खर्च का भुगतान नहीं किया जाता है, तो संपत्ति को न्यायालय के अगले आदेश तक कुर्क रखा जाएगा। बेलिफ को वारंट के निष्पादन की रिपोर्ट 14 मई 2026 तक प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।

क्या होता है बेलिफ (Bailiff)

बेलिफ (Bailiff) अदालत का एक कर्मचारी होता है, जिसका काम कोर्ट के आदेशों को लागू कराना होता है। इसे अक्सर न्यायालय परिचारक या अदालती अमला भी कहा जाता है। कोर्ट का समन, नोटिस या वारंट संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाना, अदालत के आदेश पर कुर्की या जब्ती की कार्रवाई कराना,कोर्ट में अनुशासन बनाए रखने में मदद करना, किसी व्यक्ति या संपत्ति को अदालत के आदेश अनुसार प्रस्तुत कराना,दीवानी मामलों में कोर्ट के आदेश का पालन सुनिश्चित करना.. आदि इसकी जिम्मेदारी होती है।

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