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ED Action: अवैध पत्थर खनन व परिवहन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने की बड़ी कार्रवाई, छह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

by Kanchan Kumar
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रांची । झारखंड के साहिबगंज में अवैध पत्थर खनन और परिवहन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छह आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। यह चार्जशीट रांची स्थित ईडी की विशेष अदालत में प्रस्तुत की गई है। इस मामले में प्रमुख रूप से कारोबारी अशोक कुमार तुलस्यान और उनसे जुड़ी कंपनियों के अन्य निदेशकों को आरोपी बनाया गया है।

चार्जशीट में मेसर्स सीटीएस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, इसके निदेशक अशोक कुमार तुलस्यान, सिद्धार्थ तुलस्यान, चमन तुलस्यान और पुरुषोत्तम तुलस्यान के अलावा मेसर्स इको फ्रेंडली इंफ्रा टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को भी शामिल किया गया है। जांच में सामने आया है कि इन लोगों ने बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से पत्थरों का खनन और परिवहन किया।

लगभग 17 करोड़ रुपये की हुई राजस्व हानि

ईडी के अनुसार, आरोपितों ने बिना वैध परिवहन चालान के 251 रेलवे रैक के जरिए पत्थर सामग्री भेजी। इससे सरकार को भारी नुकसान हुआ। जांच में यह पाया गया कि करीब 11.29 करोड़ रुपये के स्टोन चिप्स और 5.94 करोड़ रुपये के बोल्डर की रॉयल्टी चोरी की गई। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 17 करोड़ रुपये की राजस्व हानि हुई।

ईडी ने अदालत से अनुरोध किया है कि अपराध से अर्जित 5.39 करोड़ रुपये की राशि को जब्त करने की अनुमति दी जाए। यह रकम कथित तौर पर अवैध गतिविधियों के जरिए हासिल की गई थी।

यह पूरा मामला बिहार और झारखंड में दर्ज विभिन्न एफआईआर के आधार पर सामने आया। ईडी ने इन मामलों को आधार बनाकर ईसीआईआर दर्ज किया और जांच शुरू की। जांच की शुरुआत बिहार के भागलपुर जिले के पीरपैंती रेलवे साइडिंग से जुड़े एक मामले से हुई, जिसमें अज्ञात रेलवे अधिकारियों और सीटीएस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

साहिबगंज के जोकमारी क्षेत्र से किया जा रहा था बड़े पैमाने पर अवैध खनन

जांच के दौरान ईडी को पता चला कि साल 2015 से साहिबगंज के जोकमारी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा था। इस दौरान नियमों का उल्लंघन करते हुए बिना जरूरी चालान के खनिजों का परिवहन किया गया। इतना ही नहीं, इस अवैध कार्य को सुचारु रूप से चलाने के लिए रेलवे अधिकारियों और अन्य लोक सेवकों को रिश्वत भी दी गई।

मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अवैध कमाई को वैध दिखाने के लिए फर्जी कंपनियों का सहारा लिया गया। मेसर्स डीएस विटूमिक्स और मेसर्स करन इंटरनेशनल नाम की दो फर्जी फर्मों के जरिए नकली इनवॉइस तैयार किए गए। इन कंपनियों का वास्तविक अस्तित्व नहीं था। सीटीएस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के खातों से इन फर्मों को लगभग 4.87 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, ताकि इस धन को साफ-सुथरा दिखाया जा सके।

ईडी ने 24 अक्टूबर 2024 को साहिबगंज स्थित कंपनी के ठिकानों पर छापेमारी भी की थी। इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए थे। साथ ही आरोपितों के बयान भी दर्ज किए गए, जिनके आधार पर यह चार्जशीट तैयार की गई है।


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