जमशेदपुर : झारखंड में सामने आए कोषागार घोटाले का असर अब आम कर्मचारियों पर साफ दिखने लगा है। पूर्वी सिंहभूम जिले के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत करीब पांच हजार शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों को पिछले दो महीनों से वेतन नहीं मिला है। वेतन भुगतान रुकने से इन कर्मियों की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। सबसे खराब स्थिति नव नियुक्त शिक्षकों की है। नियुक्ति के 7 महीने बाद भी उन्हें वेतन भुगतान की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे शिक्षकों की संख्या करीब 600 है।
बताया जा रहा है कि कोषागार में गड़बड़ी के कारण बिल पास होने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है, जिसके चलते समय पर वेतन जारी नहीं हो पा रहा है। कई शिक्षक कर्ज लेकर घर चला रहे हैं, जबकि कुछ के सामने बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्च उठाना भी मुश्किल हो गया है। कर्मचारियों का कहना है कि वे नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, इसके बावजूद वेतन नहीं मिलना बेहद चिंताजनक है। इस मुद्दे को लेकर शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और उन्होंने जल्द समाधान की मांग की है। वहीं, प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच चल रही है और जल्द ही स्थिति सामान्य करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि कर्मचारियों को बकाया वेतन मिल सके।
पांच साल के वेतन भुगतान व सर्विस बुक सत्यापन के बाद होगा वेतन भुगतान
मिली जानकारी के अनुसार जिला शिक्षा विभाग डीडीओ के स्तर से सभी पुराने शिक्षकाें के पांच में हुए वेतनभुगतान की जांच करा रहा है। इसकी जिम्मेदारी डीडीओ काे दी गयी है। इसके साथ शिक्षकों का सर्विस बुक भी सत्यापित कराया जा रहा है। विभाग का कहना है कि सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही वेतन का भुगतान होगा।
मिली जानकारी के अनुसार इस प्रक्रिया में कम से कम एक माह का समय लग सकता है। क्योंकि शिक्षकों की संख्या अधिक है और सत्यापन करने वाले अधिकारियों की संख्या कम। ऐसे में अगर सत्यापन के प्रक्रिया पूरी होने के बाद वेतन भुगतान होता है तो वेतन के लिए शिक्षकों को कम से कम एक और माह का इंतजार करना होगा।
केस 1- बालक मवि के शिक्षक अबरार अहमद का किडनी खराब है उनका हर महीने में दो बार डायलसिस होता है। वे मार्च में सेवानिवृत्त हुए लेकिन उन्हें न तो मार्च माह का वेतन मिला औन नहीं अप्रैल का पेंशन। ऐसे में पैसे के अभाव में वे अपना डायलसिस नहीं करा पा रहे हैं।
केस 2- सरकारी शिक्षक वी सत्यनारायण राव ने तीन महीने पहले अपना किडनी ट्रांसप्लांट कराया। जिसमें उनके पास जितना भी पैसा था खर्च हाे गया। वहीं उन्हें हर महीने हजाराें रुपए की दवा लेनी पड़ती है लेकिन पिछले दाे महीने से वेतन नहीं मिलने से उन्हें कई प्रकार की आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
ईलाज व ईएमआई भरने तक के पैसे नहीं
दो माह से वेतन नहीं मिलने का असर शिक्षकों पर किस प्रकार हो रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि किडनी जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे शिक्षकों के पास अपने इलाज कराने तक के पैसे नहीं है। वहीं करीब 60 प्रतिशत शिक्षकों का ई एमआई कटता है पिछले दो महीने से वेतन नहीं मिलने की वजह से ईएमआई भरने में देरी हो रही है जिससे शिक्षक परेशान हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि शिक्षक वी सत्यनारायण राव किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं लेकिन उनके पास इलाज के लिए पैसे नहीं हैं।
शपथ पत्र लेकर विभाग करे भुगतान नहीं तो करेंगे आंदोलन
वहीं वेतन भुगतान में हो रही देरी पर अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि सर्विस बुक सत्यापन के बाद वेतन भुगतान एक लंबी प्रक्रिया है। ऐसे में हम विभाग से मांग करते हैं कि वे सभी शिक्षकों से शपथ पत्र लेकर भुगतान करे। ऐसा नहीं करने पर शिक्षक आंदोलन को मजबूर होंगे। उनकी मानें तो चोरी किसी और ने किया और सजा कोई और भुगत रहा है।
इन्हें नहीं मिल रहा वेतन्र
- 3500 सरकारी शिक्षक
- 1500 पारा शिक्षक
- 200 शिक्षकेतर कर्मचारी
इन बिंदुओ पर हाे रही जांच
- सभी शिक्षकाें व कर्मियाें का आधार
- पिछले पांच साल का वेतन भुगतान
- शिक्षकाें के नियुक्ति की तिथि
- सेवा पुस्तिका की जांच
शिक्षकों का वेतन भुगतान प्रक्रियाधीन है। राज्य कार्यालय की ओर से जो निर्देश प्राप्त हुआ है उसके आलोक में सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जा रही है ताकि आगे किसी प्रकार की समस्या न हो। जल्द ही वेतन का भुगतान कर दिया जाएगा।
-आशीष पांडे, डीएसई पूर्वी सिंहभूम
वेतन भुगतान काे लेकर शिक्षा विभाग का शर्त समझ से परे है। सेवापुस्तिक सत्यापन एक लंबी प्रक्रिया है इसका पालन वेतन भुगतान के लिए किया गया ताे शिक्षकाें काे वेतन मिलने में अभी दाे माह का अाैर वक्त लग जाएगा। जबकि कई शिक्षक किडनी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। वेतन नहीं मिलने की वजह से उनके इलाज में समस्या हाे रही है। एेसे विभाग एेसी प्रक्रिया अपनाएं जिससे जल्द से जल्द वेतन भुगतान हाे सके।
-अरूण सिंह, जिला अध्यक्ष, झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ

