रांची : झारखंड में पिछले ढाई माह से जारी मनरेगा कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल पर सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। मनरेगा आयुक्त मृत्युंजय कुमार बर्णवाल के निर्देश के बाद कई जिलों में हड़ताली कर्मियों को काम पर लौटने का अल्टीमेटम दिया गया है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर ड्यूटी पर नहीं लौटने वाले कर्मियों की संविदा रद्द कर सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जा सकती है।
मनरेगा कर्मियों की हड़ताल के कारण राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और विकास योजनाओं के संचालन पर असर पड़ रहा है। सरकार का कहना है कि मनरेगा एक मांग आधारित योजना है, जिसमें काम मांगने वाले ग्रामीणों को 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराना कानूनी दायित्व है। हड़ताल के चलते कई जिलों में मानव दिवस सृजन का लक्ष्य प्रभावित हुआ है और योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न हुई है।
गढ़वा जिला प्रशासन ने हड़ताल पर गए कर्मियों को दो दिनों के भीतर सेवा में वापस लौटने का निर्देश दिया है। वहीं गुमला में एक सप्ताह का समय देते हुए चेतावनी दी गई है कि अनुपस्थित रहने वाले कर्मियों की सेवाएं समाप्त कर प्रतीक्षा सूची से नई नियुक्तियां की जाएंगी। लोहरदगा प्रशासन ने भी एक जून तक हर हाल में काम पर लौटने का आदेश जारी किया है।
सूत्रों के अनुसार रांची, पलामू, लातेहार, चतरा और सिमडेगा समेत कई अन्य जिलों में भी हड़ताल पर गए कर्मियों की सूची तैयार की जा रही है। जिला प्रशासनों से अनुपालन रिपोर्ट मांगी गई है। सरकार का कहना है कि ग्रामीणों को समय पर रोजगार उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है और योजनाओं के संचालन में किसी तरह की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी।
12 मार्च से जारी है आंदोलन
झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के बैनर तले राज्यभर के मनरेगा कर्मी 12 मार्च 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। आंदोलन में कंप्यूटर सहायक और ग्राम रोजगार सेवक सहित विभिन्न संवर्ग के कर्मचारी शामिल हैं। संघ नियमितीकरण, सेवा नियमावली, मानदेय वृद्धि, सामाजिक सुरक्षा और सेवा सुरक्षा समेत कई मांगों को लेकर आंदोलनरत है। संघ का कहना है कि मांगों पर ठोस निर्णय होने तक हड़ताल जारी रहेगी। इनमें अधिकांश रोजगार सेवक अभी हड़ताल पर है।

