
खूंटी : सर्पदंश के बाद ओझा-गुणी के चक्कर में समय गंवाने की कुप्रथा खूंटी में जानलेवा साबित हो रही है। हाल ही में सही समय पर डॉक्टर के पास न जाकर ओझा से झाड़-फूंक कराने के चक्कर में दो और लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। मरने वालों में एक गर्भवती महिला और एक नाबालिग स्कूली छात्रा शामिल है।
3 दिन, 2 मौतें और वही पुरानी भूल
अड़की का तोडांगडीह गांव में 16 अगस्त को 41 साल की गर्भवती सिंता मुंडू को जहरीले सांप ने काट लिया। परिजन उन्हें सांप का विष उतरवाने के लिए ओझा-गुणी के पास बैठे रहे। इलाज के लिए समय पर अस्पताल नहीं ले गए। इलाज में देर होने से उनकी मौत हो गई।
रनिया थाना के कुल्हई गांव में 18 अगस्त को 16 साल की संजू कुमारी भी सर्पदंश की शिकार हुई। यहां भी वही भूल दोहराई गई। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। इससे पहले भी जिले में चार अन्य लोग झाड़-फूंक के अंधविश्वास के कारण जान गंवा चुके हैं।
आंकड़े दे रहे गवाही, अस्पताल पहुंचे तो बची जान
सिविल सर्जन डॉ. ललित रंजन पाठक के मुताबिक, सांप काटने के शुरुआती 1-2 घंटे बेहद नाजुक होते हैं। झाड़-फूंक से जहर कभी कम नहीं होता, केवल समय बर्बाद होता है। उन्होंने बताया कि अप्रैल से जुलाई के बीच खूंटी सदर अस्पताल पहुंचे 127 में से 121 मरीजों को समय पर ‘एंटी-स्नेक वेनम’ टीका लगाकर सुरक्षित बचा लिया गया। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी सरकारी केंद्रों पर सर्पदंश का पूरा इलाज पूरी तरह मुफ्त है। सांप काटने पर मरीज को घबराहट न होने दें। उसे शांत रखें और टोने-टोटकों में वक्त गंवाए बिना सीधे नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएं।
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