
Ranchi : डिजिटल तकनीक के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधियों के ठगी करने के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। पहले जहां फर्जी कॉल, ओटीपी और बैंकिंग फ्रॉड तक साइबर अपराध सीमित थे, वहीं अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीपफेक वीडियो, फर्जी क्यूआर कोड, सोशल मीडिया और मोबाइल एप्स के जरिए लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी आर्थिक और व्यक्तिगत क्षति का कारण बन सकती है।
इसी विषय पर साइबर पीस फाउंडेशन से जुड़े साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ कैप्टन एससी जोशी ने साइबर अपराध के बढ़ते खतरे और उससे बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी।
स्मार्टफोन की सुरक्षा सबसे जरूरी
कैप्टन एससी जोशी का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति स्मार्टफोन का इस्तेमाल करता है लेकिन उसकी सुरक्षा सेटिंग्स को सक्रिय नहीं करता, तो वह अनजाने में अपने निजी डेटा को खतरे में डाल देता है। नया मोबाइल खरीदने के बाद सबसे पहले सिक्योरिटी फीचर्स, स्क्रीन लॉक, बायोमेट्रिक सुरक्षा और अन्य सुरक्षा विकल्पों को सक्रिय करना चाहिए।
AI बना साइबर ठगों का नया हथियार
विशेषज्ञों के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने साइबर अपराधियों को नई ताकत दी है। अब अपराधी किसी की आवाज या वीडियो की हूबहू नकल कर लोगों से पैसे या गोपनीय जानकारी मांग सकते हैं। ऐसे मामलों में बिना पुष्टि किए किसी भी संदेश, कॉल या वीडियो पर भरोसा नहीं करना चाहिए। हमेशा संबंधित व्यक्ति से किसी दूसरे माध्यम से संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करें।
सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा जानकारी साझा करना खतरनाक
कैप्टन एससी जोशी का कहना है कि सोशल मीडिया पर यात्रा, महंगी खरीदारी, निजी समारोह या परिवार की जानकारी सार्वजनिक करना साइबर अपराधियों के लिए मददगार साबित हो सकता है। एक तस्वीर या लोकेशन भी अपराधियों को आपकी निजी जानकारी तक पहुंचने का मौका दे सकती है। इसलिए सोशल मीडिया पर सोच-समझकर ही जानकारी साझा करें।
स्कूलों और परिवारों में बढ़े साइबर जागरूकता
उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा की शुरुआत घर से होनी चाहिए। बच्चों को मोबाइल और इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग की जानकारी दी जानी चाहिए। साथ ही स्कूल और कॉलेजों में नियमित साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए, ताकि नई पीढ़ी साइबर अपराध से बचने के साथ दूसरों को भी जागरूक कर सके।
इन नए तरीकों से ठगी कर रहे साइबर अपराधी
आज साइबर अपराधी डीपफेक वॉयस और वीडियो कॉल, व्हाट्सएप अकाउंट हैक, फर्जी सरकारी आदेश, सोशल मीडिया पर नकली प्रोफाइल, फिशिंग ई-मेल, फर्जी क्यूआर कोड, सिम स्वैप फ्रॉड, पब्लिक वाई-फाई, नकली मोबाइल एप्स और फर्जी निजी सहायकों के जरिए लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।
साइबर सुरक्षा के लिए अपनाएं ये सावधानियां
* किसी भी लिंक या QR कोड पर क्लिक करने से पहले उसकी जांच करें।
* मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड रखें तथा 2FA (टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन) चालू करें।
* मोबाइल और एप्स को समय-समय पर अपडेट करते रहें।
* ओटीपी, बैंकिंग जानकारी या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें।
* सार्वजनिक वाई-फाई पर बैंकिंग या संवेदनशील कार्य करने से बचें।
* सोशल मीडिया पर निजी और वित्तीय जानकारी साझा न करें।
* किसी भी संदिग्ध कॉल, वीडियो या मैसेज की पहले पुष्टि करें।
* केवल आधिकारिक वेबसाइट और विश्वसनीय स्रोतों से ही ऐप डाउनलोड करें।
* मोबाइल की एप परमिशन समय-समय पर जांचते रहें।
* किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत पासवर्ड बदलें और संबंधित एजेंसी को सूचना दें।
कैप्टन एससी जोशी का कहना है कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीक से नहीं, बल्कि जागरूकता और सतर्कता से सुनिश्चित होती है। हर व्यक्ति को “Trust, But Verify” यानी भरोसा करें, लेकिन पहले सत्यापन जरूर करें, के सिद्धांत को अपनाना चाहिए। यही डिजिटल युग में सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।

