
रांची : झारखंड की सियासत इन दिनों युवाओं और नौकरियों के मुद्दों पर पूरी तरह गरमाई हुई है। विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़ा दांव चलते हुए जेपीएससी की परीक्षाओं को लेकर चौंकाने वाले ऐलान किए हैं। सदन में मुख्यमंत्री ने साफ किया कि विवादों में घिरी 14वीं जेपीएससी परीक्षा के साथ-साथ दो बैकलॉग जेपीएससी परीक्षाएं भी पूरी तरह रद्द कर दी जाएंगी। इसके अलावा, टीडीपीएल एजेंसी के जरिए कराई गई सभी परीक्षाओं की उच्चस्तरीय जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं।
डैमेज कंट्रोल की मुद्रा में सरकार
यह बड़ा राजनीतिक फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य के युवा और छात्र पिछले काफी समय से सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे थे। परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और धांधली के खिलाफ छात्र लगातार आंदोलनरत हैं।
हालांकि सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है, जिसके बाद सरकार ने नरमी दिखाते हुए इन परीक्षाओं को रद्द करने का कदम उठाया है। मुख्यमंत्री का यह रुख साफ करता है कि सरकार युवाओं के गुस्से को भांपते हुए डैमेज कंट्रोल की मुद्रा में आ गई है।
लेकिन विधानसभा के भीतर का माहौल सिर्फ घोषणाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह तीखी बयानबाजी और हंगामे का अखाड़ा बन गया। सीएम हेमंत सोरेन ने मुख्य विपक्षी दल बीजेपी पर जोरदार जुबानी हमला बोला।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पहले लोग भगवा कपड़ों में ठगी करते थे, और अब वही लोग छात्रों का चोला पहनकर राजनीति चमकाने में लगे हुए हैं। इस बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त नोकझोंक शुरू हो गई।
भाजपा विधायक ने लहराई नोटों की गड्डी
हंगामे का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। सदन की कार्यवाही के दौरान बीजेपी विधायक सीपी सिंह ने कुछ ऐसा कर दिया जिससे राजनीतिक पारा और चढ़ गया। उन्होंने सदन के भीतर ही नोटों की गड्डी लहरा दी। उनका इशारा साफ था कि राज्य में सरकारी नौकरियों और परीक्षाओं के नाम पर किस तरह पैसों का खुला खेल चल रहा है। इस घटना ने सत्तारूढ़ दल के विधायकों को भड़का दिया और सदन का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया।
छात्रों का आंदोलन जारी
सरकार भले ही छात्रों की समस्याओं को सुलझाने और उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का दावा कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि छात्रों का गुस्सा अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। सरकार की इन घोषणाओं के बाद भी छात्र आंदोलन पर डटे हुए हैं। उनकी मांग है कि सिर्फ परीक्षाएं रद्द करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि गड़बड़ी करने वाले असली चेहरों को बेनकाब कर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। अब देखना यह होगा कि सरकार के इन नए फैसलों से युवाओं का यह आंदोलन थमता है या आने वाले दिनों में राजनीतिक संग्राम और तेज होता है।
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