
जमशेदपुर : कोल्हान विश्वविद्यालय के सभागार में शुक्रवार को द्वितीय पद्मश्री रामदयाल मुण्डा स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, क्षेत्रीय केंद्र रांची और कोल्हान विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में हुए कार्यक्रम में प्रख्यात साहित्यकार एवं चिंतक महादेव टोप्पो मुख्य वक्ता थे। उन्होंने रामदयाल मुण्डा के जीवन, चिंतन और आदिवासी समाज के लिए उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की।
महादेव टोप्पो ने कहा कि रामदयाल मुण्डा ने आदिवासी भाषाओं, संस्कृति, संगीत और पारंपरिक ज्ञान को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनकी जीवन-दृष्टि में ‘जे नाची से बांची’ का भाव स्पष्ट दिखाई देता है। अमेरिका जैसे विकसित देश में लंबे समय तक रहने के बावजूद वे वहां की सुविधाओं और चकाचौंध से प्रभावित होकर अपनी जड़ों से दूर नहीं हुए। उन्होंने अपनी आदिवासी पहचान और सांस्कृतिक अस्मिता को गर्व के साथ स्वीकार किया। यही उनकी वैचारिक दृढ़ता की पहचान थी। कार्यक्रम में करीब 500 शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी शामिल हुए। डॉ. मीनाक्षी मुण्डा ने कार्यक्रम की पृष्ठभूमि रखी।
रामदयाल मुण्डा शिक्षा, साहित्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम थे: कुलपति
कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता ने कहा कि रामदयाल मुण्डा शिक्षा, साहित्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम थे। उन्होंने आदिवासी ज्ञान और परंपराओं को अकादमिक जगत से जोड़ने का महत्वपूर्ण काम किया। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को उनके विचारों और जीवन-दृष्टि से जोड़ने का माध्यम हैं। डॉ. बिनोद कुमार ने कहा कि रामदयाल मुण्डा जनजातीय भाषाओं को समुदाय की सांस्कृतिक स्मृति और पहचान का आधार मानते थे। वहीं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. कुमार संजय झा ने कहा कि वे विद्वता और लोकजीवन, विश्वविद्यालय और अखड़ा तथा परंपरा और आधुनिकता के संगम थे। उन्होंने रामदयाल मुण्डा के नाम पर समर्पित पीठ स्थापित करने की मांग की, ताकि आदिवासी ज्ञान-परंपरा पर शोध को बढ़ावा मिल सके।
दीक्षांत समारोह के तैयारियों की ली जानकारी
दीक्षांत समारोह के सफल आयोजन को लेकर कोल्हान विश्वविद्यालय में शुक्रवार को दूसरी समीक्षा बैठक आयोजित की गई। विश्वविद्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो. डॉ. अंजिला गुप्ता ने की। बैठक में सामाजिक विज्ञान, विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय के डीन, दीक्षांत समारोह के संयोजक डॉ. संजय यादव और सह-संयोजक असिस्टेंट प्रोफेसर रिंकी दोराई सहित आयोजन समिति के सभी शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर सदस्य मौजूद रहे।
बैठक के दौरान समारोह को लेकर अब तक की गई तैयारियों और विभिन्न कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही बचे हुए कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने को लेकर जिम्मेदारियां तय की गईं और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। कुलपति प्रो. डॉ. अंजिला गुप्ता ने आयोजन समिति के सदस्यों को आपसी समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सभी कार्यों को समय पर पूरा करते हुए समारोह को गरिमापूर्ण और सफल बनाने के लिए टीम भावना से काम करना जरूरी है। बैठक में तैयारियों से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा कर आयोजन को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने पर जोर दिया गया।


