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Jharkhand Assembly : सरकारी आश्वासन समिति ने विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे तीन प्रतिवेदन, लंबित आश्वासनों के लिए इमरजेंसी सेल की अनुशंसा

by Nikhil Kumar
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रांची: झारखंड विधानसभा की सरकारी आश्वासन समिति ने सदन में मंत्रियों की ओर से दिए गए आश्वासनों के क्रियान्वयन को लेकर अपनी तीन रिपोर्ट विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्र नाथ महतो को सौंप दी। समिति के सभापति अरूप चटर्जी, सदस्य कुमार उज्ज्वल और सदस्य ममता देवी ने बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर समिति के 50वें, 51वें एवं 52वें प्रतिवेदनों की प्रतियां पेश कीं। इस दौरान सदस्य उदय शंकर सिंह भी मौजूद रहे।

समिति के प्रतिवेदन में वर्ष 2010 से अब तक लंबित सरकारी आश्वासनों की स्थिति, उनके निष्पादन के लिए विभागीय स्तर पर हुई कार्रवाई और समीक्षा बैठकों की जानकारी दी गई है। समिति ने रिपोर्ट में चार प्रमुख अनुशंसाएं भी की हैं। समिति ने कहा है कि विभागीय अधिकारी लंबित आश्वासनों के क्रियान्वयन में गंभीरता और रुचि दिखाएं तथा सरकार की ओर से भी उन्हें आवश्यक सूचना उपलब्ध कराई जाए।
समिति ने कहा कि लंबित आश्वासनों का क्रियान्वयन सीधे तौर पर जनहित के मामलों के समाधान से जुड़ा है। इसलिए सरकार को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा सरकारी आश्वासन समिति की बैठकों में विभागीय अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का राज्यहित में अक्षरश: पालन सुनिश्चित करने की अनुशंसा की गई है। लंबित आश्वासनों के त्वरित निष्पादन के लिए अलग से इमरजेंसी सेल गठित करने का सुझाव भी दिया गया है।

रिपोर्ट में शिक्षा विभाग से जुड़े कई लंबित मामलों के निष्पादन की जानकारी भी दी गई है। झरिया के जामाडोबा स्थित उर्दू मध्य विद्यालय में पाइपलाइन के जरिए पेयजल की व्यवस्था पूरी कर दी गई है। इससे विद्यालय के विद्यार्थियों को नियमित रूप से पानी उपलब्ध हो रहा है। वहीं प्राथमिक शिक्षकों के अंतर-जिला स्थानांतरण के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से कई शिक्षकों का स्थानांतरण किया गया है।
जामताड़ा जिले के वेटरनरी कॉलेज से जुड़े लंबित मामले में भी आवश्यक कार्रवाई पूरी किए जाने की जानकारी समिति ने अपनी रिपोर्ट में दी है। समिति के अनुसार, झारखंड सरकार सदन में दिए गए आश्वासनों को पूरा करने और जनहित से जुड़े मामलों के समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

प्रतिवेदन के अनुसार सरकारी आश्वासन समिति अब तक 14 बैठकें कर चुकी है। इनमें आठ विभागीय और छह समीक्षात्मक बैठकें शामिल हैं। बैठकों में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ लंबित मामलों की प्रगति की समीक्षा की गई और उनके शीघ्र निष्पादन पर जोर दिया गया।

समिति के सभापति अरूप चटर्जी ने कहा कि सरकारी आश्वासन समिति के समक्ष आश्वासनों की लंबी सूची थी, लेकिन पदाधिकारियों के सहयोग से अधिकांश आश्वासनों के क्रियान्वयन के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आश्वासनों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुशासन और जनविश्वास की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।

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