
रांची : राज्य सरकार द्वारा नियुक्ति परीक्षाओं के विज्ञापन रद्द किए जाने के बाद हाईकोर्ट से राहत के बावजूद कर्मियों के योगदान को ले सचिवालय में असमंजस खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। संयुक्त सिविल सेवा और CGL-2024 परीक्षा से नियुक्त लगभग 2,394 कर्मचारियों के भविष्य को लेकर अलग-अलग विभागों में अलग-अलग नियम देखने को मिल रहे हैं। अदालत के स्पष्ट रुख के बाद भी कई विभागों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
विभागों का दोहरा रवैया
सरकार द्वारा 18 अगस्त को 22 नियुक्ति विज्ञापनों को रद्द किए जाने के फैसले को अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अदालत ने सरकार के इस आदेश को रद्द करते हुए प्रभावित कर्मचारियों से काम जारी रखने का निर्देश दिया। कोर्ट के आदेश के बाद कुछ विभागों में कर्मचारी वापस काम पर लौट चुके हैं। वहीं, खाद्य आपूर्ति विभाग जैसे कई अन्य महकमों में कर्मचारियों को अब भी काम पर लेने से परहेज किया जा रहा है।
कार्मिक विभाग के आदेश का इंतजार
कई विभागीय सचिवों का कहना है कि जब तक कार्मिक विभाग इस संबंध में कोई आधिकारिक सर्कुलर या गाइडलाइन जारी नहीं करता, तब तक वे फैसला लेने में असमर्थ हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच कार्मिक सचिव के अचानक छुट्टी पर चले जाने से प्रशासनिक स्तर पर फैसला लटक गया है। बिना आधिकारिक दिशा-निर्देश के अधिकारी कोई भी नया कदम उठाने से बच रहे हैं। दूसरी ओर, जिन दिनों कर्मचारियों ने डर और भ्रम के कारण काम नहीं किया और हाजिरी नहीं लगाई, उन दिनों की भरपाई के लिए एक नया रास्ता निकाला जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने मौखिक रूप से कर्मचारियों को उन दिनों का ‘कैजुअल लीव’ आवेदन जमा करने की सलाह दी है ताकि उनकी सेवा में तकनीकी रुकावट न आए।
फिलहाल, कोर्ट के आदेश के बावजूद सरकारी लचर रवैये और कागजी प्रक्रिया में देरी के कारण सैकड़ों कर्मचारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
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