
रांची : देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ी के खिलाफ एनएसयूआई के बैनर तले युवाओं ने रविवार को दौड़ लगाई। रांची के मोरहाबादी मैदान स्थित बापू वाटिका से ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत एक मैराथन दौड़ का आयोजन किया गया। इसमें कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता, छात्र-छात्राओं एवं युवाओं ने हिस्सा लिया। सभी ने एक मांग की कि सरकारी नौकरियां और भर्ती परीक्षाएं पूरी तरह साफ-सुथरी और पारदर्शी होनी चाहिए।
मैराथन के दौरान युवा शिक्षा व्यवस्था को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए नारे लगा रहे थे। पूरा कार्यक्रम बेहद शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से संपन्न हुआ।
युवाओं के सपनों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं : कन्हैया कुमार
कार्यक्रम में पहुंचे एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रभारी कन्हैया कुमार ने युवाओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि आज का युवा अपने भविष्य को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित है। बार-बार पेपर लीक होने की वजह से लाखों मेहनती छात्रों के सपने टूट रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि युवाओं के साथ हो रहे इस अन्याय के खिलाफ पूरे देश में एक जन-जागरण अभियान चलाया जा रहा है। कन्हैया कुमार ने भरोसा दिलाया कि जब तक छात्रों को उनका हक नहीं मिल जाता और परीक्षाएं पारदर्शी नहीं हो जातीं, तब तक यह लड़ाई थमेगी नहीं।
अधिकार और रोजगार के लिए एकजुट हों युवा
यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदयभान चीब ने कहा कि देश का युवा सिर्फ नौकरी नहीं चाहता। वह एक ऐसी परीक्षा प्रणाली चाहता है जिसमें कोई बेईमानी न हो। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ न होने दे।
कार्यक्रम के संयोजक कुमार राजा ने इसे सिर्फ एक दौड़ नहीं, बल्कि छात्रों के सम्मान की लड़ाई और एक बड़ा जनआंदोलन बताया।
उन्होंने कहा कि जब तक दोषियों को कड़ी सजा नहीं मिलती, छात्रों की यह आवाज बुलंद होती रहेगी। कांग्रेस के झारखंड सह-प्रभारी भूपेंद्र मराबी ने भी चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार करने और पेपर लीक करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
आंदोलन को मिला दिग्गजों का साथ
इस अभियान को युवाओं के साथ-साथ कई बड़े नेताओं का भी समर्थन मिला। मैराथन में सांसद सुखदेव भगत, राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, विधायक राजेश कच्छप, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय समेत कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इन सभी नेताओं ने मंच साझा कर छात्रों की इस मांग को जायज ठहराया और उनके आंदोलन को अपना पूरा समर्थन दिया।

