रांची : ग्रामीण विकास विभाग ने आउटसोर्स कर्मियों के भविष्य निधि (पीएफ) भुगतान में कथित गड़बड़ियों की जांच शुरू कर दी है। विभाग ने इस संबंध में संबंधित एजेंसी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। दरअसल, विभाग को मिली शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त सैकड़ों कर्मियों का पीएफ नियमित रूप से जमा नहीं किया जा रहा है। इतना ही नहीं, कई कर्मियों का अब तक पीएफ खाता भी नहीं खोला गया है।
मल्टीटास्किंग स्टाफ की सेवाएं उपलब्ध कराई जारी
शिकायत में कहा गया है कि विभाग और उसके विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में पिछले कई वर्षों से आउटसोर्सिंग के माध्यम से मानवबल उपलब्ध कराया जा रहा है। इनमें कंप्यूटर ऑपरेटर, कंप्यूटर सहायक, एमटीएस (मल्टीटास्किंग स्टाफ) समेत अन्य सहायक श्रेणी के कर्मी शामिल हैं। ये कर्मी ग्रामीण विकास विभाग के राज्य मुख्यालय के अलावा जिला और प्रखंड स्तरीय कार्यालयों में तैनात हैं।
ग्रामीण विकास ने मांगा जवाब
मामले को गंभीरता से लेते हुए ग्रामीण विकास विभाग ने संबंधित एजेंसी को पत्र जारी कर सभी कर्मियों के पीएफ खाते, उसमें जमा राशि और अन्य संबंधित अभिलेखों की विस्तृत जानकारी सात दिनों के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि पूर्व में मांगी गई जानकारी अधूरी पाई गई है और पीएफ में जमा राशि का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं कराया गया है।
संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर दूसरी एजेंसी से ली जा सकती है सेवा
ग्रामीण विकास विभाग के संयुक्त सचिव शहंशाह अली खान द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो संबंधित एजेंसी की सेवाएं बंद कर किसी अन्य आउटसोर्सिंग एजेंसी से सेवाएं लेने पर विचार किया जाएगा।
राशि कटने के बाद भी जमा नहीं होने का आरोप
विभागीय सूत्रों के अनुसार, शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई कर्मियों के वेतन से पीएफ की राशि काटे जाने के बावजूद उनके खातों में राशि जमा नहीं की गई है। ऐसे में विभाग अब राज्य, जिला और प्रखंड स्तर पर कार्यरत आउटसोर्स कर्मियों के पीएफ रिकॉर्ड की जांच कर रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

