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Chhath Puja Celebration : देशभर में छठ पूजा की धूम – आस्था, सामाजिक समरसता, स्वच्छता और स्वदेशी का अद्भुत संगम

Jharkhand Hindi News : छठ पूजा से देश भर में ₹38,000 करोड़ के साथ कोल्हान में 200 करोड़ व्यापार का अनुमान

by Rakesh Pandey
Chhath Puja Celebration
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जमशेदपुर : देशभर में चार दिवसीय सूर्य उपासना का महान पर्व छठ पूजा पूरे देश में आस्था, श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। इस पर्व में करोड़ों श्रद्धालु महिलाएं एवं पुरुष पूरे देश में व्रत, स्नान, अर्घ्य और पूजा के पारंपरिक विधान में शामिल हो रहे हैं। यह पर्व भारतीय संस्कृति में सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का अद्वितीय उदाहरण है, जो सामाजिक समरसता, शुद्धता, स्वच्छता, संयम और आत्मानुशासन का प्रतीक है। एक जमाने में केवल बिहार के लोग ही इस पर्व को मनाते थे, लेकिन अब यह पर्व अन्य राज्यों में भी मनाया जा रहा है, क्योंकि यह पर्व, जिसमें अस्ताचल और उदयाचल दोनों स्थिति में सूर्य की उपासना की जाती है, भारतीय संस्कृति की समावेशी भावना का प्रतीक है।


कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुसार, इस वर्ष छठ पूजा के अवसर पर देशभर में लगभग ₹38,000 करोड़ रुपये का व्यापार होने का अनुमान है। पिछले वर्ष यह आंकड़ा लगभग ₹31,000 करोड़ रुपये और 2023 में लगभग ₹27,000 करोड़ रुपये था। इससे यह स्पष्ट है कि हर वर्ष छठ पर्व के व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। झारखंड के कोल्हान प्रमंडल में छठ पूजा पर लगभग 200 करोड़ से अधिक के व्यापार होने की उम्मीद है।

देश के विभिन्न राज्य जहां छठ पूजा सबसे अधिक भव्यता से मनाई जाती है उसमें बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और ओडिशा शामिल हैं। वहीं इसके साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों में कामकाज और रोजगार के लिए बसे पूर्वांचली समाज के लोग भी छठ पूजा में पूरी श्रद्धा से सम्मिलित होते हैं।

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री तथा दिल्ली के चांदनी चौक से सांसद प्रवीण खंडेलवाल और राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री सुरेश सोंथालिया (जमशेदपुर) के अनुसार, छठ पूजा से संबंधित प्रमुख वस्तुओं में सूप, दौरा, डलिया, मिट्टी के दीपक, बांस की टोकरी, सुथनी, फल विशेषकर केला, नारियल, सेब, गन्ना, गागल, गेहूं और चावल का आटा, मिठाई, प्रसाद हेतु ठेकुआ और खजूर, पूजा सामग्री, साड़ी और पारंपरिक वस्त्र, सजावट सामग्री, दूध और घी, पूजा पात्र, टेंट व सजावट के सामान, ट्रांसपोर्ट एवं आतिथ्य सेवाएं शामिल हैं वहीं पारंपरिक परिधान जैसे साड़ियां, लहंगा-चुन्नी, सलवार-कुर्ता (महिलाओं के लिए) और कुर्ता-पायजामा, धोती (पुरुषों के लिए) की ख़रीदारी भी बड़े पैमाने पर हुई है, जिससे स्थानीय व्यापारियों और लघु उद्योगों को सीधा लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही, हस्तनिर्मित स्वदेशी वस्तुएं भी बड़े पैमाने पर बिकीं।
श्रद्धालु पारंपरिक छठ पूजा सामग्री की ख़रीदारी में अब भी व्यस्त हैं।

सोंथालिया ने कहा कि छठ पूजा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है, जो सामाजिक एकता और समर्पण का प्रतीक है। यह पर्व व्यापार को भी प्रोत्साहित करता है और स्थानीय उत्पादकों को सीधा लाभ पहुंचाता है। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को बल मिलता है।


उन्होंने कहा कि छठ पूजा में उपयोग की जाने वाली अधिकांश वस्तुएं स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों द्वारा निर्मित होती हैं, जिससे रोज़गार के नए अवसर पैदा होते हैं और देश के कुटीर उद्योग को मज़बूती मिलती है।

कैट के चेयरमैन बृज मोहन अग्रवाल ने कहा कि छठ पूजा भारतीय संस्कृति की सबसे प्राचीन और वैज्ञानिक परंपराओं में से एक है, जो प्रकृति और मानव के गहरे संबंध को दर्शाती है। छठ पूजा केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि यह स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, आत्मसंयम और सामाजिक एकता का पर्व है। इस पर्व पर देश के व्यापारी ‘स्वदेशी उत्पादों’ की बिक्री को बढ़ावा देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ एवं ‘स्वावलंबी भारत’ के अभियान को सशक्त कर रहे हैं।


उन्होंने कहा कि छठ पूजा के अवसर पर देशभर के बाजारों में अत्यधिक रौनक है और यह पर्व न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारत की आर्थिक और सांस्कृतिक एकता का भी संदेश देता है।

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