Jamshedpur : सीतारामडेरा थाना क्षेत्र के साकची न्यूबाराद्वारी स्थित नेफ्रॉन-यूरोलॉजी एंड स्टोन सेंटर में पथरी का ऑपरेशन होने के बाद एक मरीज की संदिग्ध परिस्थितियों मौत हो गई है। मरीज की मौत के बाद रविवार को परिजन अस्पताल पहुंचे और यहां जमकर हंगामा किया। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि जब मरीज की हालत बिगड़ रही थी। तो केंद्र के संचालक से कहा गया कि इन्हें किसी बड़े अस्पताल में रेफर कर दीजिए। लेकिन डॉक्टरों ने परिजनों को समझाया कि घबराने की कोई बात नहीं।
मरीज की स्थिति यहीं ठीक हो जाएगी। लेकिन, बाद में देर रात लगभग 12:00 बजे मरीज ने दम तोड़ दिया। केंद्र पर हंगामा होने के बाद जानकारी मिलने पर सीतारामडेरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस की मौजूदगी में परिजनों ने सेंटर के संचालकों के बीच मुआवजे और अन्य बिंदुओं को लेकर वार्ता चल रही है। पुलिस का कहना है कि बातचीत में मामले को सुलझा लिया गया है।
पोटका का रहने वाला था मृतक
जिस मरीज की मौत हुई है वह पोटका प्रखंड के आसनबनी के पास काला पाथर गांव का रहने वाला 50 वर्षीय पोरेस भगत है। बताते हैं कि पोरेस भगत को पथरी की शिकायत होने की वजह से न्यू बाराद्वारी के डॉक्टर डीके मिश्रा के नेफ्रॉन न्यूरोलॉजी एंड स्टोन सेंटर में भर्ती कराया गया था। यहां शुक्रवार को मरीज का ऑपरेशन किया गया।
दोपहर का भोजन करने के बाद फूलने लगा था मरीज का पेट
परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के बाद शनिवार को दोपहर में मरीज ने भोजन किया और इसी के बाद उनकी हालत खराब होने लगी। पोरेस का पेट फूलने लगा और सांस में तकलीफ होने लगी। इस पर परिजन दौड़कर डॉक्टर के पास पहुंचे। डॉक्टर आए और मरीज को देखा। इस बीच परिजनों ने डॉक्टर से गुहार लगाने लगे कि मरीज की हालत ज्यादा गंभीर हो रही है। इसे दूसरे अस्पताल में रेफर कर दीजिए। लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें रेफर करने से इनकार कर दिया और कहा कि यहीं यह ठीक हो जाएंगे। परिजनों का कहना है कि शनिवार की देर रात लगभग 12:00 बजे पोरेस की मौत हो गई। लेकिन परिजनों को रात 3:00 बजे इस बारे में बताया गया और साथ ही दबाव बनाया जाने लगा कि जल्द परिजन शव लेकर केंद्र से चले जाएं।
परिवार के अकेले कमाने वाले थे पोरेस
बताते हैं कि रविवार की सुबह पोटका से अन्य ग्रामीण भी अस्पताल पहुंचे और जमकर हंगामा हुआ। परिजनों का कहना है कि पोरेस भगत आदित्यपुर में ठेका मजदूर थे। वह एक कंपनी में काम करते थे। परिवार में वही अकेले कमाने वाले थे। उनके जाने के बाद उनकी पत्नी, एक बेटा और एक बेटी परिवार में हैं। बेटा धनबाद से माइनिंग इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है। घर के मुखिया की मौत हो जाने से परिवार में दुख का माहौल है। अब यह घर कैसे चलेगा। माइनिंग इंजीनियरिंग की फीस कौन देगा इसे लेकर तमाम सवाल हैं।

