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Gorakhpur News: इंस्टीट्यूट में तब्दील होगा बीआरडी मेडिकल कॉलेज

इसे एक इंस्टीट्यूट में तब्दील कर देने से व्यवस्था केंद्रीयकृत हो जाएगी। दूसरे कॉलेज का भी तेजी से विकास होगा, क्योंकि यह स्वायत्तशासी हो जाएगा।

by Anurag Ranjan
Gorakhpur News: इंस्टीट्यूट में तब्दील होगा बीआरडी मेडिकल कॉलेज
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गोरखपुर : पूर्वांचल के मरीजों को अर्से से इलाज मुहैया करा रहा बीआरडी मेडिकल कॉलेज जल्द ही अब इंस्टीट्यूट के रूप में तब्दील होगा। इसके लिए पहल शुरू कर दी गई है। प्रबंधन उच्चाधिकारियों के साथ इस मामले पर चर्चा होने के बाद शासन को सुझाव भेज चुका है। गौरतलब है कि पूर्व प्राचार्य ने भी इस संबंध में शासन को अपना सुझाव दिया था।

बन रहा है 100 बेड का ट्रॉमा सेंटर

बीआरडी मेडिकल कॉलेज का अब इंस्टीट्यूट जैसा विस्तार हो चुका है। यह पहले केवल नेहरू अस्पताल हुआ करता था। इसके अंतर्गत अब सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक, नर्सिंग कॉलेज, फार्मेसी कॉलेज सहित पांच सौ बेड के बाल रोग चिकित्सा संस्थान का निर्माण हो चुका है। 32 बेड का आइसीयू व 100 बेड का लेवल टू का ट्रामा सेंटर का निर्माण होने जा रहा है। फार्मेंसी कालेज व नर्सिंग कालेज के संचालन के लिए अलग-अलग प्राचार्य नियुक्त हैं। इंस्टीट्यूट बन जाने से प्राचार्य की जगह डायरेक्टर की नियुक्ति होगी और यह संस्थान स्वायत्तशासी हो जाएगा। विश्वविद्यालय के समबद्धता खत्म हो जाएगी, इसलिए तेजी से विकास होगा।

इंस्टीट्यूट बनने से केंद्रीयकृत होगी व्यवस्था

प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल के अनुसार अब कॉलेज का अत्याधिक विस्तार हो चुका है, इसलिए इसे एक इंस्टीट्यूट में तब्दील कर देने से व्यवस्था केंद्रीयकृत हो जाएगी। दूसरे कॉलेज का भी तेजी से विकास होगा, क्योंकि यह स्वायत्तशासी हो जाएगा।

बता दें कि फिलहाल बीआरडी मेडिकल कॉलेज की संबद्धता अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय लखनऊ से है। इसलिए नामांकन से लेकर डिग्री देने तक की जिम्मेदारी यही विश्वविद्यालय निभाता है। यदि किसी छात्र को अपनी डिग्री या नामांकन में संशोधन की जरूरत पड़ती है तो उसे अटल बिहारी बाजपेयी विश्वविद्यालय जाना पड़ता है। ऐसे में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के इंस्टीट्यूट बन जाने से नामांकन से लेकर डिग्री देने तक की व्यवस्था पर कॉलेज का अपना अधिकार होगा। विश्वविद्यालय पर उसकी निर्भरता खत्म हो जाएगी।

दूर की जा रहीं हैं कमियां

बीआरडी मेडिकल कॉलेज को इंस्टीट्यूट का दर्जा दिलाने के लिए कॉलेज की कमियां चिह्नित कर उन्हें दूर करने के प्रयास शुरू हो चुके हैं। कॉलेज को क्लीन एंड ग्रीन करने के लिए इंस्टीट्यूट आफ मदर एंड चाइल्ड हेल्थ इंडिया व नार्डिक सेंटर फार सस्टेनेबल हेल्थ केयर (एनसीएसएच) स्वीडन से सर्वे कराकर कमियां तलाश ली गई हैं। उन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।

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