
रांची : झारखंड में रद्द की गई नियुक्ति परीक्षाओं को लेकर सरकार और अभ्यर्थियों के बीच कानूनी लड़ाई जारी है। जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सरकार के आग्रह पर जवाब दाखिल करने के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई 14 अक्टूबर निर्धारित की।
मामला एपीपी, फॉरेस्ट ऑफिसर समेत अन्य नियुक्ति परीक्षाओं से जुड़ा है। सरकार ने 18 अगस्त को नियुक्ति का विज्ञापन रद्द कर दिया था। इसके खिलाफ अभ्यर्थियों ने अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर फैसले को चुनौती दी है।
अभय तिवारी की जमानत पर सुनवाई टली
जेएसएससी-सीजीएल पेपर लीक मामले में जेल में बंद परीक्षा माफिया अभय कुमार तिवारी की जमानत याचिका पर गुरुवार को अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत में आंशिक सुनवाई हुई। अदालत ने आगे की सुनवाई के लिए एक अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है। अभय तिवारी ने जमानत की गुहार लगाते हुए 28 अगस्त को याचिका दाखिल की थी।
सीजीएल परीक्षा-2024 के पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितता से जुड़े सीआईडी कांड संख्या 01/2025 में अभय तिवारी न्यायिक हिरासत में है। वह 22 जुलाई से जेल में बंद है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामला परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक से जुड़ा है।
वहीं, जेपीएससी की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और परीक्षा परिणाम में हेरफेर से जुड़े एक अन्य मामले में अभय तिवारी की जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है।
दो साल में बीएड करने पर सहायक आचार्य भर्ती से बाहर
दो वर्ष में बीएड की डिग्री पूरी करने के आधार पर सहायक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर किए गए अभ्यर्थी की याचिका पर गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए 29 सितंबर की तिथि निर्धारित की है।
अदालत ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को आवश्यक निर्देश प्राप्त कर जवाब दाखिल करने को कहा है।यह याचिका कुमार प्रीतम रंजन ने दायर की है। प्रार्थी ने अदालत को बताया कि उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) से बीएड की डिग्री हासिल की है।
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