
RANCHI: झारखंड में पुलिस और जेल हिरासत में हुई मौतों से जुड़े मामले में गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने प्रार्थी और राज्य सरकार दोनों का पक्ष सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की खंडपीठ में हुई। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता शादाब अंसारी ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए लिखित बहस प्रस्तुत की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 196(2) का हवाला देते हुए हिरासत में मौत के मामलों में न्यायिक जांच की अनिवार्यता पर जोर दिया।
कोर्ट ने दिया था निर्देश
मामले में पूर्व में गृह सचिव द्वारा दाखिल शपथ पत्र में बताया गया था कि वर्ष 2018 से 2025 के बीच राज्य में पुलिस और जेल हिरासत में करीब 500 लोगों की मौत हुई है। इनमें से लगभग आधे मामलों में न्यायिक जांच नहीं कराई गई। इस खुलासे के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से स्पष्ट जानकारी मांगी थी कि किन मामलों में न्यायिक जांच हुई और क्या नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन के दिशा-निर्देशों का पालन किया गया।
कोर्ट ने यह भी कहा था कि पहले दाखिल शपथ पत्र में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि हिरासत में मौत के मामलों की न्यायिक जांच हुई या नहीं। याचिकाकर्ता मो मुमताज अंसारी ने कोर्ट से मांग की है कि राज्य में जेल और न्यायिक हिरासत में हुई मौतों की स्वतंत्र जांच कराई जाए। वहीं सरकार की ओर से कहा गया था कि सभी मामलों की सूचना मैजिस्ट्रेट को दी गई थी। हालांकि कोर्ट ने रिकॉर्ड में जांच से जुड़े पर्याप्त दस्तावेज नहीं मिलने पर नाराजगी जताई थी।

