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JSSC- CGL भर्ती मामले में हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, बहाल कर्मचारियों की अभी नहीं जाएगी नौकरी

जेएसएससी-सीजीएल हाईकोर्ट ने भर्ती रद्द करने के सरकारी आदेश पर लगाई रोक, सैकड़ों कर्मचारियों को बड़ी राहत

by Kanchan Kumar
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रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एक बड़ा झटका दिया है। अदालत ने जेएसएससी-सीजीएल भर्ती (विज्ञापन संख्या 10/2023) को रद्द करने के सरकारी आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने शालिनी सुंडी, रोजलिन श्वेता तिग्गा और ऋषिकेश सज्जन द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम फैसला सुनाया।

​अदालत ने 18 अगस्त 2026 को जारी उस सरकारी अधिसूचना को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है, जिसके तहत भर्ती रद्द की गई थी। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस फैसले से प्रभावित हुए सभी नियुक्त कर्मचारियों को उनके पदों पर काम करने की अनुमति दी जाए। अदालत का मानना है कि नियम के तहत हुई किसी भी नियमित नियुक्ति को बिना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए समाप्त नहीं किया जा सकता।

​याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कोर्ट में तर्क दिया कि उनके मुवक्किलों की नियुक्ति पूरी प्रक्रिया का पालन करके हुई थी। लेकिन सरकार ने अचानक पूरी भर्ती प्रक्रिया को ही रद्द कर दिया। इस कठोर कार्रवाई से पहले किसी भी कर्मचारी को अपना पक्ष रखने या कोई नोटिस देने का मौका नहीं मिला।

बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए सेवा समाप्त करना अनुचित

​दूसरी ओर, राज्य सरकार की तरफ से महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि सीआईडी की जांच में इस भर्ती में व्यापक पैमाने पर धांधली सामने आई है। मामले में कई गिरफ्तारियां भी हुई हैं। सरकार का तर्क था कि जनहित और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया था।

​हालांकि हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए किसी की सेवा समाप्त करना प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है और यह जनहित के भी प्रतिकूल है। प्रथम दृष्टया सरकार की अधिसूचना में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं दिखा जो इस तरह की कठोर कार्रवाई को सही ठहरा सके।

याचिकाकर्ताओं को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश

​कोर्ट ने सभी याचिकाकर्ताओं को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें उन्हें यह वचन देना होगा कि इस मामले में आने वाला अंतिम न्यायिक फैसला उन पर बाध्यकारी होगा।

इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को तय की गई है। ​गौरतलब है कि धांधली के आरोप लगने के बाद कार्मिक विभाग ने एक अधिसूचना जारी की थी। इसमें 22 परीक्षाओं को रद्द करने, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया रोकने और 17 परीक्षाओं की जांच कराने का फैसला शामिल था। फिलहाल हाईकोर्ट के इस आदेश से सैकड़ों कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है।
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