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Kolhan University: केयू की लेटलतीफी से छात्र परेशान, मान्यता मिलने के तीन माह बाद भी को-ऑपरेटिव लॉ कॉलेज में प्रवेश परीक्षा की तारीख तक तय नहीं

अगस्त खत्म होने को,अब तक आवेदन और प्रवेश परीक्षा की तारीख तय नहीं,120 सीटों को मिली BCI की मंजूरी, फिर भी दाखिले का इंतजार

by Kanchan Kumar
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जमशेदपुर: कोल्हान विश्वविद्यालय (केयू) की लचर कार्यशैली का खामियाजा एक बार फिर कानून की पढ़ाई करने का सपना देख रहे सैकड़ों विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। अगस्त का महीना समाप्त होने को है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन अब तक जमशेदपुर को-ऑपरेटिव लॉ कॉलेज में नए सत्र के दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा की तिथि तक घोषित नहीं कर पाया है। विवि की इस सुस्ती के कारण सत्र 2026-29 के तहत एलएलबी में नामांकन की पूरी प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है।

सामान्य शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार, जून या जुलाई माह में प्रवेश परीक्षा संपन्न हो जानी चाहिए थी, ताकि अगस्त तक नामांकन प्रक्रिया पूरी कर नियमित कक्षाएं शुरू की जा सकें। हैरानी की बात यह है कि विवि प्रवेश परीक्षा आयोजित करना तो दूर, अब तक आवेदन पत्र (एप्लीकेशन फॉर्म) भरने की प्रक्रिया भी शुरू नहीं कर सका है। मालूम हो कि कोऑपरेटिव लॉ कॉलेज कोल्हान विवि का एक मात्र सरकारी लॉ कॉलेज हैं और पूरे कोल्हान प्रमंडल के बच्चे कानून की पढ़ाई के लिए इस कालेज पर निर्भर हैं इसके बाद भी केयू हर बार यहां एडमिशन लेने में देरी करता है।

जून में ही मिल गयी भी मान्यता

यह स्थिति तब है जब बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने जून महीने में ही को-ऑपरेटिव लॉ कॉलेज में 120 सीटों पर एलएलबी सत्र 2026-29 के संचालन की स्वीकृति प्रदान कर दी थी। बीसीआई से हरी झंडी मिलने के बावजूद विश्वविद्यालय स्तर पर दाखिला प्रक्रिया को आगे न बढ़ाना सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।

छात्रों को हो रहा दोहरा नुकसान

सत्र का पटरी से उतरना:को-ऑपरेटिव लॉ कॉलेज के पिछले तीन सत्र पहले से ही एक से डेढ़ साल के विलंब से चल रहे हैं। अब 2026-29 सत्र में हो रही इस नई देरी से यह सत्र भी बुरी तरह प्रभावित होगा और तीन साल की डिग्री पूरी होने में चार से पांच साल का समय लग जाएगा।

करियर और प्रतियोगी परीक्षाओं में नुकसान: सत्र पिछड़ने से लॉ ग्रेजुएट्स न्यायिक सेवा , एपीओ, क्लैट-पीजी या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में समय पर शामिल होने से वंचित रह जाते हैं।

आर्थिक और मानसिक बोझ: सत्र में देरी होने से छात्रों का कीमती समय बर्बाद हो रहा है। जो छात्र अन्य शहरों या निजी कॉलेजों में मोटी फीस देकर नहीं पढ़ सकते, वे केवल इस सरकारी कॉलेज के भरोसे बैठे हैं और उनका करियर अधर में लटका हुआ है।

“एलएलबी में प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने के लिए हमने विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक कार्यालय को पत्र लिखा है। उम्मीद है विवि अगले महीने तिथि घोषित कर आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर देगा। हमारा प्रयास है कि इस बार सत्र शुरू होने में कम से कम देरी हो।”  –डॉ जितेंद्र कुमार, प्रिंसिपल कोऑपरेटिव लॉ कालेज।

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