
रांची: झारखंड में सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं हैं। झारखंड लोकसेवा आयोग के बाद अब झारखंड कर्मचारी चयन आयोग JSSC की क्षेत्रीय कार्यकर्ता नियुक्ति परीक्षा भी विवादों के घेरे में आ गई है। 19 जुलाई को आयोजित इस परीक्षा में अभ्यर्थियों ने धांधली, अव्यवस्था और गलत सवाल पूछने के गंभीर आरोप लगाए हैं। हालात यह रहे कि परीक्षा देने के लिए पंजीकृत 3.22 लाख से अधिक उम्मीदवारों में से महज 26.77% अर्थात 86,444 अभ्यर्थी ही परीक्षा में शामिल हो सके।
कोई पूर्व सूचना नहीं, परीक्षा के दिन मिला ई-मेल
अभ्यर्थियों का आरोप है कि आयोग की लापरवाही के कारण हजारों उम्मीदवार परीक्षा देने से वंचित रह गए। कई लोगों को एडमिट कार्ड की जानकारी उसी दिन ई-मेल से मिली, जिस दिन परीक्षा थी। ऐसे ही अभ्यर्थियों में पलामू के रहने वाले मुकेश प्रजापति भी हैं। उनका परीक्षा केंद्र उनके घर से करीब 600 किलोमीटर दूर, गोड्डा में, बना दिया गया। उन्होंने एडमिट कार्ड तो डाउनलोड कर लिया था, लेकिन खराब मौसम, लगातार बारिश और गाड़ियों की किल्लत की वजह से वे इतनी लंबी दूरी तय नहीं कर सके। पश्चिमी सिंहभूम के राजेश लोहार जमशेदपुर में मजदूरी करते हैं। उन्हें 19 जुलाई को दोपहर 2:59 बजे ई-मेल मिला कि उनका सेंटर 240 किमी दूर लातेहार में है। जबकि परीक्षा हॉल में एंट्री का समय दोपहर 3:00 बजे तक ही था। ऐसे में इतने कम समय में लातेहार पहुंचना नामुमकिन था।
संताली भाषा के पेपर में 40 सवाल आउट ऑफ सिलेबस
मुसीबत यहीं खत्म नहीं हुई। परीक्षा में शामिल हुए छात्रों ने संताली भाषा पेपर-2 के प्रश्नपत्र पर भी बड़े सवाल खड़े किए हैं। अभ्यर्थियों ने परीक्षा नियंत्रक को ज्ञापन सौंपकर शिकायत दर्ज कराई है । बताया है कि 100 में से 40 सवाल पूरी तरह सिलेबस से बाहर के थे।
कम से कम 4 सवाल तकनीकी रूप से गलत पाए गए। संताली साहित्य, संस्कृति और लोक गाथाओं से जुड़े कई प्रश्नों के तथ्य भी गलत थे।
प्रश्न भ्रमित करने वाला
छात्रों का कहना है कि प्रश्न जरूरत से ज्यादा कठिन और भ्रमित करने वाला था। अभ्यर्थियों ने इस परीक्षा को तुरंत रद्द कर दोबारा पारदर्शी तरीके से कराने की मांग की है।
दूसरी तरफ, JSSC के सचिव सुधीर गुप्ता ने अभ्यर्थियों के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि आयोग ने 11 से 14 जुलाई के बीच सभी का सिटी इंटिमेशन स्लिप जारी कर दिया था और 16 जुलाई से एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का लिंक भी एक्टिव था। आयोग के मुताबिक, प्रक्रिया में कोई ढिलाई नहीं बरती गई थी। दूर-दराज सेंटर और एडमिट कार्ड की गड़बड़ी से परेशान छात्र उच्चस्तरीय जांच की मांग पर अड़े हैं।

