Home » Jamshedpur Muharram: जाकिरनगर इमामबारगाह में निकला अमारी व ताबूत का जुलूस

Jamshedpur Muharram: जाकिरनगर इमामबारगाह में निकला अमारी व ताबूत का जुलूस

इमाम हसन अस्करी व इमाम हुसैन की शहादत को किया गया याद, कल से खत्म हो जाएगा इमाम हुसैन से जुड़े 67 दिनों का शोक, ईद-ए-जहरा कल

by Mujtaba Haider Rizvi
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

Jamshedpur : इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत के हवाले से चल रहा 67 दिनी गम आठ रबीउल अव्वल को खत्म हो गया। शनिवार को इस गम के आखिरी दिन मानगो के जाकिर नगर इमामबारगाह में अमारी, ताबूत और अलम का जुलूस निकला। मजलिस में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत का जिक्र सुन कर अजादार जारोकतार रोए। इमाम महदी अलैहिस्सलाम के वालिद 11 वें इमाम हजरत हसन अस्करी अलैहिस्सलाम की शहादत को भी याद किया गया। इस जुलूस के साथ ही इमाम हुसैन की शहादत से जुड़ा 67 दिनों का शोक आज से खत्म हो गया। रविवार नौ रबीउल अव्वल को शिया मुसलमान ईद-ए-जहरा मनाएंगे।

मुहर्रम से शुरू हुए इस गम की आखिरी मजलिस मानगो के जाकिर नगर इमामबारगाह में एक बजे शुरू हुई। मजलिस को मौलाना जकी हैदर ने खिताब फरमाया। उन्होंने अपनी मजलिस के दौरान लोगों को नेक अमल करने की हिदायत दी। इसके बाद हजरत मोहम्मद मुस्तफा स और उनके अहलेबैत के फजाएल लोगों को सुनाए। इसके बाद इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के 18 साल के जवान हजरत अली अकबर की शहादत बयान की। मौलाना जकी हैदर ने पढ़ा कि जब अली अकबर अपने बाबा इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम से इजाजत लेकर मकतल की तरफ रवाना हुए तो इमाम अपने बेटे के पीछे पीछे चल रहे थे। अली अकबर ने पीछे आहट सुन कर पीछे मुड़ कर देखा और कहा बाबा आप हमें जंग की इजाजत दे चुके हैं। फिर पीछे पीछे क्यों आ रहे हैं। इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने फरमाया बेटा तुम हमशक्ले पैगंबर हो।

अगर तुम्हारा कोई बेटा होता तब समझते कि बाप कैसे अपने लाल से मुहब्बत करता है। हजरत अली अकबर के सीने में जब भाला लगा तो वह घोड़े से गिरे और अपने बाबा को आवाज दी। बेटे की आवाज सुन कर इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की आंखों के सामने अंधेरा छा गया। इमाम अपने लख्ते जिगर के पास पहुंचे और अली अकबर के सीने से नैजे की अनी निकाली। अनी के साथ अली अकबर का कलेजा बाहर आ गया। बेटे ने अपने बाबा की गोद में दम तोड़ दिया। इमाम ने नौहा पढ़ा और बेटे की लाश लेकर खैमे में आए। मजलिस में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के छह साल के बेटे अली असगर की शहादत भी बयान की गई। इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के भाई हजरत अब्बास की शहादत का जिक्र सुन कर लोग खूब रोए।

आठ रबीउल अव्वल को आज ही के दिन 12 वें इमाम हजरत महदी अलैहिस्सलाम के वालिद 11 वें इमाम हजरत हसन अस्करी अलैहिस्सलाम की भी शहादत हुई थी। उन्हें जहर देकर शहीद किया गया था। 11 वें इमाम अलैहिस्सलाम की भी शहादत का जिक्र हुआ। मजलिस के बाद अलम, इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के ताबूत, हजरत अली असगर अलैहिस्सलाम का गहवारा और अमारियां बरामद हुईं।

इमाम हुसैन के बेटे चौथे इमाम हजरत जैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम और उनके घर की औरतों और बच्चों को यजीद ने इमाम हुसैन की शहादत के बाद कैद कर लिया था। इन सबको दमिश्क ले जाया गया था। यहीं की जेल में इमाम के घर के लोग कैद थे। इन्हें जब रिहाई मिली तो इमाम का पूरा कुनबा मदीना पहुंचा था। इसी हवाले से अमारियां निकाली जाती हैं। मजलिस के बाद नौहाखानी और सीनाजनी हुई। रेहान और अन्य नौहाखानों ने नौहे पढ़े। अलविदाई मातम भी हुआ।

ईद -ए- जहरा कल

शिया मुसलमान रविवार को ईद-ए-जहरा मनाएंगे। यह वह दिन है जब इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के कातिल को मौत की सजा दी गई थी। कर्बला की घटना के बाद जनाब मुख्तार ने बदला लेना शुरू किया था। कूफे में उन्होंने हुकूमत कायम कर ली थी। इसके बाद इमाम हुसैन के कातिलों को पकड़-पकड़ कर सजा दी जा रही थी। इतिहास में है कि नौ रबीउल अव्वल को इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का कातिल कर्बला में यजीदी फौज का सिपहसालार अम्र इब्ने साद पकड़ा गया था और उसे मौत की सजा दी गई थी। यह खबर सुन कर इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के बेटे हजरत जैनुल आब्दीन अलैहिस्सलाम कर्बला के वाकए के बाद पहली बार मुस्कुराए थे। इसीलिए, इस दिन को ईद-ए-जहरा के तौर पर मनाया जाता है। शिया मुसलमान आज से लाल, पीले आदि रंग के कपड़े पहनना शुरू कर देंगे। घरों में विभिन्न पकवान बनना भी आज से शुरू हो जाएगा।

Related Articles

Leave a Comment