
चाईबासा : दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल के राउरकेला स्टेशन के मुख्य द्वार के सामने बना नया शेड गिरने के 72 घंटे बाद भी रेल प्रशासन की ओर से किसी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई है। इससे रेलवे की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
3 महीने में स्क्रैप बना शेड
करीब 1 करोड़ रुपये की लागत से बना यह शेड मात्र तीन माह में ही गिरकर कबाड़ बन गया। हादसे के बाद रेलवे ने टूटे हिस्से को खोलकर क्रेन से बड़े वाहनों में लादा और राउरकेला रेलवे कॉलोनी स्थित ट्रेनिंग स्कूल परिसर में रखवा दिया।स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण में 6 एमएम की जगह 4 एमएम मोटी पाइप लगाई गई। साथ ही वेल्डिंग भी घटिया स्तर की थी। हालांकि रेलवे ने अभी इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
निगरानी पर सवाल
जिस जगह शेड बना था, वहां से राउरकेला रेलवे एडीईएन कार्यालय की दूरी सिर्फ 2 किलोमीटर है। इसके बावजूद निर्माण के दौरान गुणवत्ता जांच किस स्तर पर हुई, यह बड़ा सवाल है। मानकों की अनदेखी हुई तो उसे समय रहते क्यों नहीं रोका गया।
पहले भी उठे थे सवाल
इसी ठेकेदार द्वारा एसटी कॉलोनी में बनी बाउंड्री वॉल में भी कुछ महीनों में ही बड़ी दरारें आ गई हैं। वहीं कुछ महीने पहले राउरकेला में पावर ब्लॉक लिए बिना एक रेलकर्मी को ब्रिज पर काम कराया गया था। उस दौरान एडीईएन और आईओडब्ल्यू की मौजूदगी बताई गई। काम के दौरान कर्मी ट्रैक्शन करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया था। उस मामले को भी दबा दिया गया था।
लोगों में नाराजगी, जांच की मांग
लगातार सामने आ रहे निर्माण और सुरक्षा से जुड़े मामलों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने से रेलकर्मियों और आम जनता में नाराजगी है। लोगों ने रेल मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि राउरकेला स्टेशन शेड सहित अन्य निर्माणों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच हो। साथ ही दोषी अधिकारियों पर कड़ी विभागीय कार्रवाई और सरकारी धन की हानि की जवाबदेही तय की जाए।

