
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में आयकर विभाग ने रियल एस्टेट सेक्टर में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभाग द्वारा किए गए एक सर्वे में शहर के दो नामी डेवलपर्स के ठिकानों से करीब 120 करोड़ रुपये की अघोषित आय और बेनामी संपत्ति के कागजात बरामद किए गए हैं। जमीन और फ्लैटों के सौदों में लगभग 90 करोड़ रुपये के कैपिटल गेन टैक्स की चोरी का सनसनीखेज मामला भी सामने आया है। रांची के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी सर्वे में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की टैक्स हेराफेरी पकड़ी गई है।
तीन दिनों तक चला मैराथन सर्वे
आयकर विभाग की टीमों ने 15 जुलाई को दोनों बिल्डर समूहों के विभिन्न ठिकानों पर एक साथ सर्वे की शुरुआत की थी। दिन-रात चली यह जांच 17 जुलाई की देर रात जाकर थमी। शुरुआती छानबीन में यह बात साफ हो गई है कि दोनों बिल्डरों ने मिलकर 120 करोड़ रुपये की अपनी असली कमाई को सरकारी रिकॉर्ड में नहीं दर्शाया था। अघोषित काली कमाई का इस्तेमाल शहर और उसके आसपास के इलाकों में कीमती जमीनें और संपत्तियां खरीदने में किया गया, जिसकी जानकारी टैक्स विभाग को नहीं दी गई।
डेवलपमेंट एग्रीमेंट में टैक्स चोरी का खेल
जांच के दौरान अधिकारियों के हाथ ऐसे दस्तावेज लगे हैं, जिनसे 90 करोड़ रुपये के कैपिटल गेन टैक्स की चोरी का पता चलता है। इन बिल्डरों ने कुछ कंपनियों के साथ मिलकर जमीन डेवलपमेंट के सौदे किए थे। नियमों के मुताबिक, आयकर अधिनियम की धारा 45(1) के तहत अगर कोई कंपनी किसी बिल्डर के साथ डेवलपमेंट एग्रीमेंट करती है, तो उसे उसी वित्तीय वर्ष में कैपिटल गेन टैक्स जमा करना होता है। बिल्डरों के डिजिटल डिवाइस का डिलिटेड डाटा निकालने के लिए कोलकाता से फॉरेंसिक टीम बुलाई थी। टीम ने बिल्डरों के मोबाइल से डिलिटेड चैट निकाले। इसमें फ्लैट की बिक्री के दौरान नकद लेन-देन का ब्योरा दर्ज था। आयकर विभाग के अधिकारियों ने बिल्डरों और फ्लैट खरीदने वालों से भी पूछताछ की जिसमें नकद लेन-देन की बात मने आई।

