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Jharkhand Finance Minister : जनप्रतिनिधियों की अनदेखी पर वित्त मंत्री की चिट्ठी, बोले- कुछ अधिकारी अहंकार से भी भरे हैं, सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित कराने का निर्देश

by Nikhil Kumar
Jharkhand Finance Minister
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रांची: झारखंड में जनप्रतिनिधियों के साथ अधिकारियों के व्यवहार और सरकार के निर्देशों के अनुपालन को लेकर वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने अपर मुख्य सचिव, मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग (समन्वय) को पत्र लिखकर सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित कराने तथा इस संबंध में पूर्व में जारी सरकारी निर्देशों का कड़ाई से पालन कराने की मांग की है।

पत्र में उन्होंने साफ लिखा है कि राज्य में संवेदनशील अधिकारियों की कमी नहीं है, लेकिन कुछ अधिकारी अहंकार से भी भरे हैं, जो शिष्टाचार संबंधी निर्देशों का पालन नहीं करते। उन्होंने लिखा है कि अनुपालन की बात तो दूर कुछ ऐसे भी सरकारी पदाधिकारी है जिनका व्यवहार अहंकार भरा होता है यह संसदीय लोकतंत्र व्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है। ऐसे में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना हमारी सरकार की जिम्मेवारी है। वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने बताया कि बतौर संसदीय कार्य मंत्री यह जिम्मेदारी समझते हुए विभाग को पत्र लिखा है और पूर्व के दिशा निर्देशों का ही अनुपालन करने को कहा।

मंत्री ने अपने पत्र में 18 जनवरी 2021 और 28 जून 2021 को मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग की ओर से जारी निर्देशों का हवाला देते हुए कहा है कि सभी विभागों और अधीनस्थ कार्यालयों को जनप्रतिनिधियों के पत्रों का समयबद्ध जवाब देने, उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार करने तथा उनकी समस्याओं पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। भारत सरकार भी समय-समय पर इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी करती रही है, लेकिन इनका प्रभावी अनुपालन नहीं हो रहा है।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों के पत्रों एवं सुझावों का समय पर जवाब नहीं दिया जाता। कई अधिकारी फोन कॉल रिसीव नहीं करते, मोबाइल स्विच ऑफ रखते हैं और संवाद से बचते हैं। इसे देखते हुए मंत्रिमंडल सचिवालय द्वारा जारी पांच सूत्रीय निर्देशों जिसमें जनप्रतिनिधियों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार, उनकी बात धैर्यपूर्वक सुनना, समयबद्ध कार्रवाई करना, मोबाइल स्विच ऑफ नहीं रखना और कॉल मिस होने पर वापस फोन करना—का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने की जरूरत बताई गई है।

पत्र में राधाकृष्ण किशोर ने कहा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत और संवेदनशील बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच सम्मानजनक संवाद लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना है। यदि संसदीय परंपराओं की अनदेखी हुई तो विधायिका और कार्यपालिका के बीच दूरी बढ़ेगी, जो लोकतंत्र के लिए उचित नहीं होगा।

पुराने निर्देशों की याद दिलाई है: राधा कृष्ण किशोर

‘वित्त मंत्री ने फोटोन न्यूज़ से बात करते हुए बताया की मैंने सिर्फ पुराने निर्देशों की याद दिलाई है। अपने पत्र में कोई नया आदेश जारी नहीं किया है, बल्कि सरकार और भारत सरकार की ओर से पहले से जारी शिष्टाचार संबंधी निर्देशों का ही हवाला दिया है। उन्होंने कहा, लगातार मुझे भी शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ अधिकारी जनप्रतिनिधियों के फोन नहीं उठाते, पत्रों का समय पर जवाब नहीं देते और जारी निर्देशों का पालन नहीं करते। कुछ अधिकारियों के व्यवहार में अहंकार भी दिखाई देता है। इसलिए यह पत्र लिखना जरूरी लगा, ताकि व्यवस्था सुधरे और लोकतांत्रिक प्रणाली में जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय और सम्मान की परंपरा कायम रहे।”

मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत रहेगा, जब सरकार के जारी निर्देश केवल फाइलों और परिपत्रों तक सीमित न रहकर जमीन पर भी उनका ईमानदारी से पालन हो। पत्र की प्रतिलिपि झारखंड विधानसभा अध्यक्ष को भी भेजी गई है।

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