
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के सोनुवा क्षेत्र में अवैध बालू के कारोबार के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। सोनुवा अंचल अधिकारी अनुज टेटे के नेतृत्व में सोमवार देर रात सोनुवा-चक्रधरपुर मुख्य मार्ग पर औचक छापेमारी की गई, जिसमें अवैध बालू परिवहन में लगे दो हाइवा और दो ट्रैक्टर ट्रॉलियों को धर दबोचा गया। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद इन सभी वाहनों को अग्रिम कार्रवाई के लिए खनन विभाग को सुपुर्द कर दिया गया था। चारों वाहनों पर विधिवत मामला दर्ज कर उन्हें आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए सोनुवा थाना को सौंप दिया गया है। इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से इलाके के अवैध बालू कारोबारियों और माफियाओं के बीच हड़कंप मच गया है।
रात के अंधेरे में होता था अवैध परिवहन
सूत्रों के अनुसार 15 अक्टूबर की मध्य रात्रि के बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के प्रतिबंधों की अवधि समाप्त होते ही गुदड़ी और गोइलकेरा के कारो नदी घाटों से बालू की अवैध निकासी और ढुलाई का खेल फिर से सक्रिय हो गया था। रात के सन्नाटे का फायदा उठाकर तस्कर ट्रैक्टरों और हाइवा के जरिए गोइलकेरा के रास्ते चक्रधरपुर की तरफ धड़ल्ले से बालू भेज रहे थे।
टास्क फोर्स की बैठक के बाद हुई कार्रवाई
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही डीसी मनीष कुमार और एसपी अमित रेणु की संयुक्त अध्यक्षता में जिला स्तरीय खनन टास्क फोर्स की उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। इस बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि जिले में किसी भी तरह के अवैध खनन और परिवहन को पूरी तरह रोका जाए और सरकारी राजस्व में बढ़ोतरी की जाए। उच्चाधिकारियों के इसी निर्देश का पालन करते हुए सोनुवा सीओ ने यह बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया।
आगे भी जारी रहेगा अभियान: सीओ
सोनूवा के सीओ अनुज टेटे ने मीडिया को जानकारी दी कि अवैध खनन और बालू की तस्करी के खिलाफ यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। विशेष तौर पर रात्रि के समय होने वाले अवैध परिवहन पर प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है। फिलहाल, पकड़े गए वाहनों के मालिकों और चालकों से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह बालू किस घाट से उठाया गया था और इसे कहां सप्लाई किया जा रहा था।
ग्रामीणों ने की सराहना
प्रशासन की इस मुस्तैदी से स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है और कार्रवाई का स्वागत किया है। ग्रामीणों का मानना है कि अवैध घाटों से बेतरतीब बालू उठान के कारण नदियों का प्राकृतिक सौंदर्य और स्वरूप दोनों नष्ट हो रहे हैं, साथ ही सरकार को भी भारी राजस्व का चूना लग रहा है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन की इस सख्ती से इस अवैध धंधे पर स्थायी रूप से लगाम लगेगी।

