
रांची : मशहूर फिल्म एडिटर और फिल्मकार असीम सिन्हा ने कहा कि झारखंड में स्थानीय सिनेमा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की पूरी संभावना है। इसके लिए शहरों के साथ गांवों में भी सिनेमा के लिए सकारात्मक माहौल तैयार करने और फिल्म निर्माण का बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की जरूरत है। वह शनिवार को सूचना भवन सभागार में झारखंड फिल्म विकास निगम लिमिटेड (जेएफडीसीएल) की ओर से आयोजित ‘मीट द मेंटर’ कार्यक्रम में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि फिल्म उद्योग के विकास के लिए वित्तीय सहायता के साथ सीड फंडिंग, मजबूत मेंटरिंग व्यवस्था और फिल्मों व पटकथाओं के मूल्यांकन की बेहतर प्रणाली जरूरी है। स्थानीय भाषा, कला और प्रतिभाओं को प्राथमिकता देने से झारखंड की फिल्मों को वैश्विक पहचान मिल सकती है।
असीम सिन्हा ने अपने फिल्मी सफर के अनुभव साझा करते हुए कहा कि पिछले 40 वर्षों से उनकी इच्छा झारखंड में फिल्म इंस्टीट्यूट स्थापित करने की रही है, जो अब साकार होती दिख रही है। उन्होंने बताया कि रांची में पढ़ाई के बाद मुंबई जाकर सैकड़ों फिल्मों के संपादन का अनुभव हासिल किया। उन्होंने श्याम बेनेगल, तिग्मांशु धूलिया, कल्पना लाजमी, केतन मेहता और कुंदन शाह समेत कई फिल्मकारों के साथ काम करने के अनुभव भी साझा किए। वर्तमान में वह 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की गैर-फीचर फिल्म श्रेणी की जूरी के अध्यक्ष हैं।
मौके पर उपनिदेशक सैय्यद राशिद अख्तर ने उन्हें शॉल और मोमेंटो देकर सम्मानित किया। संयुक्त निदेशक आनंद ने बताया कि असीम सिन्हा ने 100 से अधिक फिल्मों का संपादन किया है। कार्यक्रम में सहायक निदेशक अभय कुमार, जेब अख्तर, अनुज कुमार, महेश माझी समेत फिल्म जगत से जुड़े लोग उपस्थित थे।


